प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जालंधर ने फरवरी 2025 में अमेरिका से निकाले गए भारतीयों से संबंधित 'डॉन्की रूट केस' में मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत पंजाब और हरियाणा के अमृतसर, संगरूर, पटियाला और मोगा जिलों और अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया है।
तलाशी के दौरान विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरण बरामद और जब्त किए गए हैं। जाँच एजेंसी ने गुरुवार को तलाशी के दौरान, लोगों को डंकी रूट से भेजने वाले एक एजेंट के घर से 30 से ज़्यादा असली पासपोर्ट बरामद किए हैं।
ईडी ने पंजाब पुलिस और हरियाणा पुलिस द्वारा बीएनएस 2023 (तत्कालीन आईपीसी 1860) और आव्रजन अधिनियम, 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पता चला कि जो लोग अमेरिका जाने के इच्छुक थे, उन्हें ट्रैवल एजेंटों और बिचौलियों ने कानूनी माध्यमों से भेजने का झूठा वादा करके ठगा था।
हालांकि, उन्हें डोनकर्स (मानव तस्करी के माध्यम) और माफिया की मदद से खतरनाक रास्तों से अवैध रूप से विभिन्न देशों की सीमाओं को पार करके डंकी रूट के माध्यम से अमेरिका भेज दिया गया था। इसके अलावा, एजेंट, डोनकर्स और माफिया के साथ मिलीभगत करके, व्यक्तियों के लिए खतरनाक स्थिति पैदा करते थे ताकि उनके परिवार के सदस्यों से और अधिक पैसे वसूल सकें। तलाशी के दौरान, लोगों को 'गधा मार्ग' से भेजने वाले एक एजेंट के घर से 30 से ज्यादा असली पासपोर्ट मिले हैं।
कई दूसरे विश्वसनीय सबूत भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि एजेंटों ने संभावित ग्राहकों को ठगकर करोड़ों रुपये का नकद/हवाला लेन-देन किया है। इसके अलावा, तलाशी के दौरान कई एजेंटों और इमिग्रेशन एजेंसियों के नाम भी सामने आए हैं जो बड़े पैमाने पर अवैध रूप से डंकी रूट से अवैध व्यापार कर रहे हैं।