ईडी ने कर्नाटक में नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े पांच ठिकानों पर छापेमारी की है। आरोप है कि जेनेरिक दवाओं को नई शीशियों में भरकर उन पर फाइजर की महंगी एंटीबायोटिक दवाओं के फर्जी लेबल लगाए जाते थे। एजेंसी ने एक आरोपी का करीब नौ लाख रुपये का बैंक खाता फ्रीज किया है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कर्नाटक में नकली दवाओं के रैकेट में कथित तौर पर शामिल व्यक्तियों और संस्थाओं से जुड़े पांच ठिकानों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की है। एजेंसी ने एक आरोपी के बैंक खाते को भी फ्रीज कर दिया है, जिसमें लगभग 9 लाख रुपये जमा हैं।
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किस धारा के तहत की गई कार्रवाई?
ये तलाशी 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत ली गई। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की उस जांच का हिस्सा है, जो 18 अगस्त, 2026 को तवारेकेरे पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर चल रही है।
क्या है पूरा मामला?
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला 18 अगस्त को सी.के. तंड्या गांव में एक रिहायशी जगह पर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस की ओर से की गई संयुक्त छापेमारी से शुरू हुआ। छापेमारी के दौरान, आरोपी कथित तौर पर बिना किसी वैध लाइसेंस, परमिट या अनुमति के दवाइयां और फार्मास्युटिकल ड्रग्स जमा करते हुए पाए गए। साथ ही, वे इन दवाइयों के लेबल भी बदल रहे थे। बंगलूरू के संयुक्त आयुक्त (पश्चिम) वामसी कृष्णा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रहा है।
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ईडी ने क्या आरोप लगाया?
ईडी की जांच के अनुसार, आर प्रशांत नाम के एक व्यक्ति ने बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। आरोप है कि वहां बिना जरूरी ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं का निर्माण, रीपैकेजिंग और रीलेबलिंग की जाती थी।
आरोप है कि अलग-अलग राज्यों के मैन्युफैक्चरिंग सेंटरों से सस्ती और थोक मात्रा में दवाएं मंगाई जाती थीं। फिर इन्हें नई शीशियों में भरकर, धोखाधड़ी से 'फाइजर' कंपनी की महंगी एंटीबायोटिक दवाओं जैसे कि 'जाविसेफ्टा' और 'एम्ब्लेवियो' के लेबल लगा दिए जाते थे। हालांकि इन शीशियों में जेनेरिक दवाएं होती थीं, लेकिन इन पर 'फाइजर' ब्रांड का लेबल लगा होता था