फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ED: 262 अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से पॉलिटेक्निक लेक्चरर बनाया, तैयार किया ओएमआर शीट का एक अतिरिक्त सेट

Thu, 25 Jun 2026 12:58 PM IST
Asmita Tripathi डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला

सार

प्रवर्तन निदेशालय ने (ईडी) के चेन्नई ज़ोनल ऑफिस ने 23 जून को चेन्नई, मदुरै, त्रिची और कोयंबटूर में 21 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत की गई है। ये
विज्ञापन
ईडी - फोटो : ईडी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रवर्तन निदेशालय ने (ईडी) के चेन्नई ज़ोनल ऑफिस ने 23 जून को चेन्नई, मदुरै, त्रिची और कोयंबटूर में 21 जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत की गई है। ये मामला 2017 में टीचर्स रिक्रूटमेंट बोर्ड (टीआरबी) द्वारा सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर भर्ती परीक्षा में ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ से जुड़ा है। 262 अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से पॉलिटेक्निक लेक्चरर बनाने के लिए ओएमआर शीट का एक अतिरिक्त सेट तैयार किया गया था।    
विज्ञापन


ईडी ने तमिलनाडु पुलिस द्वारा 2017 में दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि टीआरबी में परीक्षा के बाद स्कैनिंग के दौरान, आरोपियों ने स्कैन की गई तस्वीरों में डिजिटल रूप से बदलाव किया। फाइनल उत्तर कुंजी के मुकाबले कुछ खास उम्मीदवारों के नंबर बढ़ा दिए गए। आरोपियों ने खास उम्मीदवारों के नाम वाली 385 सेकेंडरी ओएमआर शीट का एक अतिरिक्त सेट तैयार किया था। 

नतीजतन, 262 अयोग्य उम्मीदवारों को धोखाधड़ी से पॉलिटेक्निक लेक्चरर पद के लिए योग्य दिखाया गया। बाद में सार्वजनिक याचिकाओं के ज़रिए इस गड़बड़ी का पता चला, जिसके बाद दोबारा मूल्यांकन हुआ। नतीजा वापस लिया गया और मामला दर्ज हुआ। तमिलनाडु पुलिस ने पहली चार्जशीट 2021 में और दूसरी चार्जशीट अक्टूबर 2023 में दाखिल की थी।
विज्ञापन

ईडी की जांच से पता चला कि वी. सुब्रमण्यन और उनके सहयोगी मिस्टर सुरेश पॉल की अगुवाई में आरोपियों ने डाटाटेक के टेक्निकल स्टाफ़ (शेख दाऊद नसार और I. रघुपति) की मदद से 2017 में परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने की साज़िश रची। एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क के ज़रिए, उन्होंने इच्छुक उम्मीदवारों को निशाना बनाया। कैश में 14–16 लाख रुपये जमा किए गए। इस तरह जमा किए गए कैश को 'म्यूल अकाउंट्स' और प्रॉक्सी फ़र्मों (ट्रस्ट एंटरप्राइजेज़, विज़डम एंटरप्राइजेज़ और सूर्यम एंटरप्राइजेज़) और सहयोगियों व परिवार के सदस्यों के खातों के ज़रिए घुमाया गया। बाद में इसे अचल संपत्ति और गहनों में बदल दिया गया।

जांच एजेंसी की तलाशी का मकसद घोटाले से जुड़ी 'अपराध से हुई कमाई' का पता लगाना था। तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक चीज़ें ज़ब्त की गईं, जिनमें एजेंटों/आरोपियों द्वारा जमा किए गए कैश का रिकॉर्ड, आरोपियों/एजेंटों के पास रखी अलग-अलग सरकारी परीक्षाओं की ओएमआर शीट की उम्मीदवार [कार्बन] कॉपी, उम्मीदवारों के अलग-अलग सर्टिफ़िकेट की कॉपी, डिजिटल सबूत वगैरह शामिल हैं। 13.18 लाख रुपये का कैश ज़ब्त किया गया। 56 बैंक खाते और 2 डीमैट खाते फ़्रीज़ कर दिए गए हैं। आरोपियों और उनके सहयोगियों के नाम पर मौजूद 36 अचल संपत्तियों की जानकारी/दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए हैं, जिनकी गाइडेंस वैल्यू लगभग 9.67 करोड़ रुपये है (मार्केट वैल्यू 20 करोड़ रुपये से ज़्यादा होगी)।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें