लोकसभा चुनाव से पहले विश्व बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार होने के कारण अर्थव्यवस्था में बीते साल के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के मुताबिक बीते साल वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 फीसदी थी। इस साल पहली तिमाही में इसके 7.2 फीसदी होने की संभावना है।
सीएसओ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2018- 19 के लिए आर्थिक वृद्धि की दर 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि परिषद का मानना है कि राजकोषीय अनुशासन के तय लक्ष्य से दूर नहीं हुआ जा सकता है लेकिन इसके साथ ही सामाजिक क्षेत्र में ध्यान देना भी जरूरी है।
रिपोर्ट में भारत को लेकर कहा गया है कि यहां की वृद्धि दर 2019 में बढ़कर 7.3 फीसदी हो सकती है। यह निरंतर तभी आगे बढ़ेगी जब निजी निवेश और निजी खपत में सुधार आएगा। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक वृद्धि का फायदा उठाने के लिए निवेश और निर्यात बढ़ाने की आवश्यकता है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विकास के दौरान महिलाओं की स्थिति ठीक नहीं रही है। इस दौरान महिलाओं के लिए पर्याप्त संख्या में रोजगार पैदा नहीं हो रहा है। बीते सालों में कामकाजी महिलाओं की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दशक पहले ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में कामकाजी महिलाओं का आंकड़ा 44 फीसदी था। जो अब महज 27.4 फीसदी ही रह गया है।
भारत के अलावा महिलाओं के रोजगार के मामले में पाकिस्तान (25 प्रतिशत) और अरब देशों (23 प्रतिशत) की स्थिति खराब है। वहीं पड़ोसी देश नेपाल की स्थिति काफी बेहतर है। यहां 80 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है। बांग्लादेश में भी भारत से बेहतर स्थिति है। यहां 57.4 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है, चीन में 64 फीसदी और अमेरिका में 56.3 फीसदी महिलाओं के पास रोजगार है।