आर्थिक सर्वे 2026 ने बता दिया है कि मजबूत आर्थिक स्थिति के लिए भारत को अपने घरेलू आंतरिक बाजार पर भरोसा करना चाहिए। घरेलू उपभोक्ताओं के बल पर कई अंतरराष्ट्रीय विषमताओं के बाद भी देश वित्त वर्ष 2025-26 में करीब सात प्रतिशत वृद्धि दर हासिल कर सकता है। आर्थिक सर्वे में वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8 से 7.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। केंद्र सरकार राजकोषीय घाटे को 4.8 प्रतिशत पर सीमित करने में सफल रही है, लेकिन विदेशी निवेशकों के द्वारा लगातार निकासी और रूपये की कीमतों में गिरावट उसके लिए चिंता का कारण बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री जनधन योजना में मार्च 2025 तक 55.02 करोड़ बैंक खाते खोलना और इसमें भी ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में 36.63 करोड़ खाते खोलकर केंद्र सरकार ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की योजना सफलतापूर्वक चलाई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आई ताकत और लोगों की खरीदारी क्षमता में सुधार इसका बड़ा प्रमाण रहा है।
देश में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 12 करोड़ को पार कर गई है। इसमें से 25 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिला निवेशकों की इस विशाल संख्या को देखते हुए कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार की महिला सशक्तिकरण की योजनाएं कारगर हो रही हैं। आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे देखते हुए सरकार बजट में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ सामने आ सकती है।
यूरोपीय यूनियन से करार का लाभ लेने को तैयार भारत
आर्थिक सर्वे में कहा गया है कि भारत का वैश्विक व्यापार तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2005 की तुलना में अब यह करीब दो गुना हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय उत्पादकों को गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं बनाकर वैश्विक बाजार में भारत का ब्रांड मजबूत करना चाहिए। यूरोपीय यूनियन के 27 देशों से हुआ करार भारतीय निवेशकों-उत्पादकों को लाभ देने के लिए तैयार है, लेकिन उसके लिए भारतीय उत्पादकों को गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
सर्विस सेक्टर को ताकत बनाएगा भारत
भारत सर्विस सेक्टर के मामले में वैश्विक ताकत बनता दिखाई दे रहा है। भारत का सर्विस सेक्टर निर्यात 2025 तक रिकॉर्ड 387.6 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। इसमें 13.6 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। भारत ने यूरोपीय यूनियन से ऐतिहासिक करार किया है। यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था सर्विस सेक्टर के निर्यात के भरोसे ही मजबूत बनी हुई है। भारत इस अवसर का लाभ उठाते हुए सर्विस सेक्टर की मजबूत ताकत बन सकता है। इसे मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार बजट में प्रावधान कर सकती है।
देश में 23 आईआईटी और 21 आईआईएम, 20 एम्स के सहारे विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी दक्ष युवा तैयार किए जा रहे हैं। ये भारत के सर्विस सेक्टर में मजबूत ताकत बनने का आधार बन सकते हैं। देश में ढांचागत निवेश बढ़ रहा है। इससे नौकरियों का सृजन हो रहा है। बजट में केंद्र सरकार ढांचागत निवेश को बढ़ाने का विश्वसनीय विकल्प आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है।
AI की क्षमता को पहचान रही सरकार
इस बार आर्थिक सर्वे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए अलग से चैप्टर दिया गया है। यह दिखाता है कि सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता पहचान रही है। एआई के कारण दुनिया की सकल जीडीपी में 2030 तक 15.7 ट्रिलियन डॉलर की भारी वृद्धि का अनुमान जताया गया है। भारत इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। बजट में देश में एआई को बढ़ाने के उपाय देखने को मिल सकते हैं।
ऑटो सेक्टर को मिली छूट का दिखा असर
केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव करते हुए वाहनों की बिक्री को पंख लगा दिए थे। इसका असर यह हुआ है कि पिछले वर्ष रिकॉर्ड वाहनों की वृद्धि हुई। इसके कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर एक बार फिर देश की आर्थिक प्रगति का बड़ा कारण बनता दिखाई दे रहा है। सर्वे के अनुसार बीते वर्ष में पूरे देश में दोपहिया वाहनों, यात्री और व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदूषण के विरुद्ध सरकारों के प्रयास का परिणाम भी दिखाई दे रहा है क्योंकि ई वाहनों की बिक्री में वृद्धि बनी हुई है। ऑटो सेक्टर तीन करोड़ लोगों के रोजगार और जीएसटी संग्रह में 15 प्रतिशत का योगदान देने वाला क्षेत्र है। यूरोपीय यूनियन के देशों से हुए समझौते के कारण इस सेक्टर में एक नई तेजी आने की संभावना है।