Assam Politics: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने ‘मिया’ शब्द को लेकर विपक्ष की आलोचना पर पलटवार किया हैं। उन्होंने कहा कि यह शब्द उनकी निजी भाषा या कल्पना नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा असम में हो रहे 'चुपचाप और भेदभावपूर्ण जनसांख्यिकीय अतिक्रमण' के संदर्भ में है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अक्सर अवैध बांग्लादेशी शरणार्थियों को संबोधित करने के लिए ‘मिया’ शब्द का उपयोग करते हैं। विपक्ष इस शब्द को लेकर लगातार उन पर निशाना साधता है और राज्य में सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाता है। विपक्ष के इस आरोप पर गुरुवार को सीएम सरमा ने पलटवार किया।
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‘सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़ें विपक्ष’
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जो लोग इस शब्द को लेकर उनकी आलोचना कर रहे हैं, उन्हें पहले सुप्रीम कोर्ट का आदेश पढ़ लेना चाहिए, जिसमें राज्य में हो रहे चुपचाप और भेदभावपूर्ण जनसांख्यिकीय अतिक्रमण का उल्लेख किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह शब्द उनकी निजी भाषा या कल्पना नहीं है और न ही कोई राजनीतिक अतिशयोक्ति है। उनका प्रयास असम की पहचान, सुरक्षा और भविष्य की रक्षा के लिए हैं, न कि किसी धर्म या किसी भारतीय नागरिक को निशाना बनाने के लिए।
सीएम ने अपने पोस्ट में क्या कहा?
गुरुवार को किए गए अपने पोस्ट में सरमा ने कहा कि असम में चुपचाप और द्वेषपूर्ण तरीके से हो रहे जनसांख्यिकीय अतिक्रमण के कारण निचले असम के भू-रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिले खतरे में पड़ सकते हैं। उनका कहना था कि अवैध प्रवासियों की आमद इन जिलों को मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बदल रही है। इसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश से इनके विलय की मांग उठ सकती है। निचले असम के हाथ से निकल जाने पर उत्तर-पूर्वी भारत का भूभाग शेष भारत से अलग हो जाएगा और क्षेत्र के समृद्ध प्राकृतिक संसाधन राष्ट्र के लिए खो जाएंगे।
असम में दशकों से चली आ रही समस्या
सीएम ने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय “जनसांख्यिकीय अतिक्रमण” जैसे शब्दों का प्रयोग करता है और क्षेत्र व राष्ट्रीय एकता के संभावित नुकसान की चेतावनी देता है, तो इसे स्वीकार करना किसी समुदाय के खिलाफ घृणा या सांप्रदायिकता नहीं है। यह असम में दशकों से चली आ रही गंभीर समस्या की वास्तविकता को दर्शाता है।
‘असम की पहचान को सुरक्षित करने की कोशिश’
सरमा ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि उनका प्रयास किसी धर्म या किसी भारतीय नागरिक के खिलाफ नहीं है। उनका मकसद असम की पहचान, सुरक्षा और भविष्य की रक्षा करना है, ठीक वैसे ही जैसे सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्र को आगाह किया है। सीएम ने चेताया कि इस चेतावनी को अनदेखा करना असम और भारत दोनों के लिए वास्तविक अन्याय होगा।