हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीवी संबोधन के लिए पहले से अनुमति नहीं ली गई थी। यह दावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता साकेत गोखले ने गुरुवार को किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उनकी ओर से दायर सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन के जवाब में इसकी पुष्टि की है।
साकेत गोखले ने पोस्ट में क्या दावा किया?
साकेत गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें गोखले ने आरटीआई आवेदन के जवाब को 'चौंकाने वाला खुलासा' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) के उल्लंघन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की।
पूर्व राज्यसभा सांसद गोखले ने कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान दिए गए इस संबोधन को 'नारी शक्ति' के मुद्दे पर केंद्रित बताया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री ने इसका इस्तेमाल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) जैसे विपक्षी दलों की आलोचना करने के लिए किया। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन विपक्षी दलों ने संसद में परिसीमन विधेयक को पारित नहीं होने दिया।
गोखले ने कहा, उन्होंने (पीएम मोदी) एक चौंकाने वाला शब्द इस्तेमाल करते हुए कहा कि 'इन पार्टियों ने महिलाओं के अधिकारों की भ्रूण हत्या की है।' उन्होंने आरटीआई आवेदन और निर्वाचन आयोग के जवाब के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए कहा कि आयोग ने उन्हें बताया कि टीवी प्रसारण की अनुमति मांगने के लिए 'ऐसा कोई आवेदन' प्राप्त नहीं हुआ था।
गोखले की ओर से आरटीआई आवेदन के जवाब साझा किए गए। एक सवाल किया गया था कि क्या एमसीसी नियमों के अनुसार टीवी प्रसारण की अनुमति के लिए कोई आवेदन मिला था? इसके जवाब में कहा गया- ऐसा कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। इस सवाल पर कि क्या भाषण के लिए पहले से अनुमति दी गई थी, जवाब में कहा गया कि 'मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं है'। टीएमसी नेता ने आरोप लगाया कि पहले से अनुमति न होने के बावजूद निर्वाचन आयोग ने प्रधानमंत्री के खिलाफ 'कोई कार्रवाई नहीं की'।
गोखले ने पोस्ट में कहा, इसी वजह से आज हमारी सबसे अहम लड़ाई समझौता कर चुके निर्वाचन आयोग के खिलाफ है और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावों की रक्षा करना जरूरी है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ नेतृत्व के पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, जब निर्वाचन आयोग खुद चुनावों में हेरफेर करे और मोदी-शाह के लिए काम करे, तब हम खुद को लोकतंत्र कहलाने का अधिकार खो देते हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी ने 18 अप्रैल को राष्ट्र को संबोधित किया था। उस समय पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुदुचेरी में आदर्श आचार संहिता लागू थी। संसद के निचले सदन की ओर से संविधान संशोधन विधेयक को खारिज किए जाने के एक दिन बाद यह संबोधन दिया गया था। इस विधेयक में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने तथा 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के तहत विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर विधेयक को पारित नहीं होने देने का आरोप लगाया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि उन्होंने भ्रूण हत्या का पाप किया है और महिलाओं से उन्हें कड़ी सजा मिलेगी।