पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा के समय से जुड़े सवाल पर निर्वाचन आयोग ने कहा कि सही समय आने पर इसकी घोषणा की जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अब तक देश में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए 10 से अधिक एसआईआर आयोजित की जा चुकी हैं।
एसआईआर पर कुछ राजनीतिक दल भ्रम फैला रहे, हम झूठे आरोपों से नहीं डरते
उन्होंने एसआईआर को लेकर जारी विवाद के बीच पहली बार हो रही प्रेस वार्ता में कहा, बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का उद्देश्य मतदाता सूची में सुधार करना है। लेकिन यह गंभीर चिंता की बात है कि कुछ राजनीतिक दल और उनके नेता जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर एसआईआर को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रख कर गोली चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों की मांग पर ही बिहार में एसआईआर की शुरुआत की गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) कुमार ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई मतदाताओं ने दोहरे मतदान की शिकायत की थी, लेकिन जब उनसे इसका सबूत मांगा गया तो उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया। ऐसे झूठे आरोपों से न तो चुनाव आयोग और न ही कोई मतदाता डरने वाला है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से लगभग सभी दल मतदाता सूची में सुधार की मांग कर रहे हैं और इसी मांग को पूरा करने के लिए चुनाव आयोग ने बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की शुरुआत की है।
यह संविधान का अपमान
सीईसी कुमार ने कहा कि अगर चुनाव याचिकाएं 45 दिनों के भीतर दायर नहीं की जातीं, लेकिन वोट चोरी के आरोप लगाए जाते हैं, तो यह भारतीय संविधान का अपमान है। उन्होंने एसआईआर पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों से 15 दिनों के भीतर मतदाता सूची के मसौदे पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का आग्रह किया। उन्होंने दावा किया कि सभी मतदाता, राजनीतिक दल और बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) जमीनी स्तर पर पारदर्शिता के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें वीडियो प्रशंसापत्र भी शामिल हैं। इसमें राजनीतिक दलों की ओर से नामित 1.6 लााख बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) भी शामिल हैं।
ये भी पढ़ें- EC: 'चुनाव आयोग के लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं, सभी समान', बिहार SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त की दो-टूक
आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल गंभीर
सीईसी ने कहा प्रमाणित दस्तावेज और जिला-स्तरीय पार्टी अध्यक्षों और उनके मनोनीत बीएलए की आवाजें या तो उनके राज्य या राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक नहीं पहुंच रही हैं, या जानबूझकर भ्रम फैलाने के लिए जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है। जब 7 करोड़ से अधिक मतदाता चुनाव आयोग के साथ खड़े हों, तो न तो चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर और न ही मतदाताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया जा सकता है।
बिना अनुमति मतदाताओं की तस्वीर पेश की
निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि हमने कुछ दिन पहले देखा कि कई मतदाताओं की तस्वीरें बिना उनकी अनुमति के मीडिया के सामने पेश की गईं। उन पर आरोप लगाए गए, उनका इस्तेमाल किया गया। क्या चुनाव आयोग को किसी भी मतदाता, चाहे वह उनकी मां हो, बहू हो, बेटी हो, के सीसीटीवी वीडियो साझा करने चाहिए? सिर्फ वे ही लोग वोट देते हैं जिनका नाम मतदाता सूची में होता है और वे अपने उम्मीदवार को चुनते हैं।
ये भी पढ़ें- ECI: 'कुछ दल SIR पर गलत सूचना फैला रहे, हम दोहरे मतदान और वोट चोरी के निराधार आरोपों से नहीं डरते', सीईसी बोले
राहुल को सात दिन का अल्टीमेटम
चुनाव आयोग के खिलाफ वोट चोरी के आरोपों के लिए राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए ज्ञानेश कुमार ने कांग्रेस नेता को अपने दावों के समर्थन में हस्ताक्षरित हलफनामा प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि एक पीपीटी दिखाकर, जिसमें चुनाव आयोग के आंकड़े नहीं हैं, गलत तरीके से विश्लेषण करना और यह कहना कि किसी महिला ने दो बार मतदान किया है, बेहद गंभीर आरोप है। आयोग चुप नहीं बैठैगा। उन्होंने कहा, राहुल गांधी अपने आरोपों के समर्थन में सबूत के साथ हलफनामा दें या देश से माफी मांगे। कोई तीसरा विकल्प नहीं है। अगर सात दिन में हलफनामा नहीं दिया जाता है तो इसका मतलब है कि सभी आरोप निराधार और राजनीति से प्रेरित हैं।