चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखकर राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में नोटा का विकल्प खत्म करने के लिए कहा है। आयोग ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले बाद जारी किया है। शीर्ष अदालत का मानना था कि राज्यसभा चुनावों में नोटा से भ्रष्टाचार और दल बदल को बढ़ावा मिलेगा।
चुनाव आयोग ने मंगलवार को जारी अपने आदेश में कहा है कि आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में नोटा (नन ऑफ द अबव) का इस्तेमाल न किया जाए। आयोग के मुताबिक लोकसभा और विधानसभा जैसे प्रत्यक्ष चुनावों में ही नोटा का प्रयोग हो।
सभी राज्यों के रिटर्निंग अफसरों को कहा गया है कि राज्य परिषदों और राज्य विधानसभा परिषदों के चुनावों में बैलेट पेपर पर नोटा का कॉलम न हो। चुनाव आयोग ने 2014 और 2015 में दो अधिसूचनाएं जारी करके राज्यसभा चुनाव में नोटा को लागू किया था।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त को दिए अपने फैसले में राज्यसभा चुनाव में नोटा पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि राज्यसभा चुनाव में नोटा लागू करने से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविल्कर और डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने यह फैसला गुजरात कांग्रेस नेता शैलेश मनुभाई परमार की याचिका पर सुनाया था।
अदालत का कहना था कि नोटा का इस्तेमाल सिर्फ आम चुनावों तक ही सीमित रखा जाए और आम लोगों से जुड़े चुनावों में ही हो। वहीं 2013 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने लोकसभा, विधानसभा चुनाव में नोटा का विकल्प ईवीएम मशीनों में शुरू किया था।