आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी को अपनी छवि खराब करने वाला बताया। साथ ही इसे हटवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। याचिका में अपील की कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को प्रकाशित-प्रसारित करने से मीडिया को रोका जाए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की दोनों मांगें खारिज कर दीं। इसके खिलाफ आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की टिप्पणी को तल्ख और गैरजरूरी तो माना पर हटाया नहीं। मीडिया पर भी अदालती टिप्पणियों के प्रकाशन-प्रसारण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।