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झटका: चुनाव आयोग के वकील ने दिया इस्तीफा, कहा- मेरी नैतिकता का कामकाज से नहीं बैठ रहा तालमेल

Sat, 08 May 2021 12:13 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आयोग की पैरवी करने के लिए तय वकीलों के पैनल के सदस्य मोहित डी राम ने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे में लिखा मोहित ने लिखा कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यशैली और मेरे मूल्यों के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा है। इसलिए मैं पद से इस्तीफा दे रहा हूं।
 
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निर्वाचन आयोग - फोटो : Election Commission
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विस्तार
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कोरोना संकट के दौरान विधानसभा चुनाव में ढील बरतने के लिए आलोचना का शिकार हो रहे निर्वाचन आयोग को एक और तगड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में आयोग की पैरवी करने के लिए तय वकीलों के पैनल के सदस्य मोहित डी राम ने इस्तीफा दे दिया है।

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चुनाव आयोग के वकील मोहित डी राम ने शुक्रवार को आयोग के कानून विभाग के निदेशक को इस्तीफा भेजा। इसमें उन्होंने लिखा, "चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यशैली और मेरे मूल्यों के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा है। इसलिए मैं पद से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं अपने कार्यालयों में सभी लंबित मामलों में फाइलों, एनओसी और ‘वकालतनामाओं' का सुचारू हस्तांतरण करता हूं।"

मोहित डी राम ने वर्ष 2013 से सुप्रीम कोर्ट व अन्य उच्च अदालतों में चुनाव आयोग की पैरवी कर रहे थे। उन्होंने इस्तीफे के साथ भेजे अपने पत्र में लिखा, ''मेरे लिए यह सम्मान की बात है कि मैंने चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व किया। मैंने आयोग के स्टैंडिंग काउंसिल (स्थायी कानूनी सलाहकार) के रूप में शुरुआत की। वहां से चुनाव आयोग के वकीलों के पैनल का सदस्य बना। यह उपलब्धि मेरे करियर में मील के पत्थर की तरह रही है, लेकिन अब मैं अपनी इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहता हूं क्योंकि आयोग की कार्यशैली के साथ मैं तालमेल नहीं बिठा पा रहा हूं।''
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मद्रास हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार
बता दें कि कुछ दिन पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कोरोना की दूसरी लहर के लिए आयोग को जिम्मेदार ठहराया था। अदालत ने कहा था कि आयोग ने पहले तो महामारी के दौर में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए। इस दौरान कोरोना का प्रसार रोकने संबंधी नियमों का भी पालन नहीं कराया। इससे लाखों लोगों की जान जोखिम में पड़ी। आयोग के अफसरों पर इसके लिए हत्या का मुकदमा चलना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत 

आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी को अपनी छवि खराब करने वाला बताया। साथ ही इसे हटवाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई। याचिका में अपील की कि अदालत की मौखिक टिप्पणियों को प्रकाशित-प्रसारित करने से मीडिया को रोका जाए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की दोनों मांगें खारिज कर दीं। इसके खिलाफ आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन उसे वहां से भी राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की टिप्पणी को तल्ख और गैरजरूरी तो माना पर हटाया नहीं। मीडिया पर भी अदालती टिप्पणियों के प्रकाशन-प्रसारण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
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