एक सूत्र ने बताया कि वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल टकराव वाले शेष स्थानों से सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग करने जा रहा है। भारत और चीन के सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले कुछ स्थानों पर तीन साल से अधिक समय से गतिरोध बना हुआ है जबकि दोनों पक्षों ने व्यापक राजनयिक और सैन्य वार्ता के बाद कई इलाकों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
23 अप्रैल को हुई सैन्य वार्ता के 18वें दौर में भारतीय पक्ष ने डेपसांग और डेमचोक में लंबित मुद्दों को हल करने के लिए दबाव डाला था। सूत्रों ने बताया कि नए दौर की वार्ता भारत की ओर चुशुल-मोल्दो सीमा बैठक स्थल पर होगी। वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह मुख्यालय वाली 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रशिम बाली द्वारा किए जाने की संभावना है। चीनी दल का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर द्वारा किए जाने की उम्मीद है।
पिछले महीने विदेश मंत्रालय ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले साल बाली में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान रात्रिभोज में द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की जरूरत पर बात की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने 24 जुलाई को जोहान्सबर्ग में पांच देशों के समूह ब्रिक्स की बैठक से इतर चीन के शीर्ष राजनयिक वांग यी से मुलाकात की थी।
बैठक के बारे में विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि डोभाल ने बताया कि 2020 से भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी पर स्थिति ने 'रणनीतिक विश्वास और संबंधों के सार्वजनिक एवं राजनीतिक आधार को कम' कर दिया है। बयान में कहा गया है कि एनएसए ने स्थिति को पूरी तरह से हल करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने के महत्व पर जोर दिया ताकि द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति के लिए बाधाओं को दूर किया जा सके।
भारत कहता रहा है कि चीन के साथ उसके संबंध तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति नहीं होती। पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध पांच मई, 2020 को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पैदा हुआ था। जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में काफी गिरावट आई थी, जो दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था। सिलसिलेवार सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने 2021 में पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण किनारों और गोगरा क्षेत्र में पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी की।