पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित भारतीय सेना के पूर्वी कमान ने मंगलवार को 54वें विजय दिवस के मौके पर विजय दुर्ग में गरिमामय और भावपूर्ण पुष्पांजलि समारोह का आयोजन किया। इस मौके पर 1971 के युद्ध में बांग्लादेश मुक्ति के महान उद्देश्य के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर शहीदों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया।
समारोह श्रद्धा और कृतज्ञता से परिपूर्ण रहा। यह 1971 के युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की ऐतिहासिक विजय और भारत-बांग्लादेश के बीच साझा बलिदान से बने स्थायी मैत्री संबंधों की याद दिलाने वाला अवसर रहा। इस गरिमामय कार्यक्रम में बांग्लादेश से आए प्रतिनिधिमंडल, 1971 के युद्ध के पूर्व सैनिक, वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिक, भारतीय सशस्त्र बलों के सेवारत जवान, पूर्व सैनिक तथा विशिष्ट नागरिक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में मेजर जनरल राजेश अरुण मोघे, वीएसएम (जीओसी, बंगाल सब एरिया), लेफ्टिनेंट जनरल मोहित मल्होत्रा, एवीएसएम, एसएम (चीफ ऑफ स्टाफ, मुख्यालय पूर्वी कमान), ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद लुत्फुर रहमान, पीएससी, पीएचडी (बांग्लादेश सैन्य प्रतिनिधिमंडल), व बांग्लादेश के जाटिया मुक्ति जोद्धा संगठन के वरिष्ठतम सदस्य और ‘वीर प्रतिक’ से सम्मानित मोहम्मद हबीबुल आलम शामिल रहे।
इसके साथ ही एयर मार्शल सूरत सिंह, एवीएसएम, वीएम (एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ईस्टर्न एयर कमांड), लेफ्टिनेंट जनरल गुरबख्श सिंह सिहोता (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल जेआर मुखर्जी (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल आर सी तिवारी, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, एसएम (जीओसी-इन-चीफ, पूर्वी कमान) और मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) वी. के. सिंह भी उपस्थित रहे।
समारोह में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस द्वारा अंतिम पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इस अवसर पर सेना के एविएशन हेलीकॉप्टरों द्वारा पुष्पवर्षा की गई, जिसने वातावरण को अत्यंत भावुक और स्मरणीय बना दिया।
इस मौके पर राज्यपाल ने कहा, डॉ. सीवी आनंद बोस ने दोनों देशों के शहीदों और पूर्व सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनके बलिदान, पराक्रम और अटूट संकल्प ने लाखों लोगों की आकांक्षाओं को स्वर दिया और बांग्लादेश के एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में जन्म का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत बांग्लादेश को मान्यता देने वाला पहला देश था, जिससे आपसी सम्मान, विश्वास और सहयोग पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव पड़ी। पूर्वी कमान के लिए यह अवसर विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 1971 के युद्ध में उसकी भूमिका निर्णायक और ऐतिहासिक रही थी। विजय दिवस का यह आयोजन कमान की विरासत में साहस, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है।