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दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के खतरों का अध्ययन शुरू, एनसीएस कर रहा सर्वेक्षण

Tue, 05 Jan 2021 08:59 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भूकंप (सांकेतिक फोटो) - फोटो : iStock
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पिछले साल दिल्ली-एनसीआर में आए भूकंपों के बाद भूकंपीय खतरों के सटीक आकलन के लिए राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी एनसीएस ने एक भू-भौतिकीय सर्वेक्षण शुरू किया है।पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने कहा कि एनसीएस पृथ्वी की सतह की खामियों का पता लगाने के लिए उपग्रह द्वारा ली गई तस्वीरों और भूगर्भीय क्षेत्र की जांच का विश्लेषण और विवेचना करेगा। भूभौतिकीय और भूगर्भीय दोनों जमीनी सर्वेक्षणों के 31 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है।
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वर्ष 2020 में आए भूकंप के झटकों के बाद दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भूकंपीय नेटवर्क को मजबूत किया गया है, ताकि भूकंप के केंद्र स्थल की सटीकता में सुधार किया जा सके। गौरतलब है कि एनसीएस पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत एक निकाय है।

बीते वर्ष हल्के झटके आए
दिल्ली में वर्ष 2020 के अप्रैल से लेकर अगस्त तक भूकंप के चार हल्के झटके आए। दिल्ली के उत्तर-पूर्वी सीमावर्ती क्षेत्र में 12 अप्रैल को 3.5 तीव्रता वाला पहला भूकंप आया था। इन भूकंपों के बाद हल्के झटकों की एक दर्जन और घटनाएं हुईं। 10 मई को 3.4 तीव्रता का दूसरा भूकंप आने के तुरंत बाद पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने भूकंप संबंधी गतिविधि से निपटने के लिए विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की।
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने कहा-भूकंप के स्रोत का पता लगाना जरूरी
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का कहना है कि स्थानीय भूकंपीय नेटवर्क को मजबूत करके और उप-सतही लक्षणों की पड़ताल करके दिल्ली तथा आसपास के क्षेत्रों में आए भूकंपों के स्रोतों को चिह्नित करना आवश्यक है। हो सकता है इन्हीं में कुछ खामियां हों, जो भूकंप का कारण बन सकती है। 

11 अस्थाई स्टेशन बनाकर अध्ययन
भूकंप और उनके झटकों के सटीक स्रोतों का पता लगाने के लिए 11 अस्थायी अतिरिक्त स्टेशन बनाकर दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंपीय नेटवर्क को मजबूत बनाया गया ताकि क्षेत्र में ज्ञात दोषों को दूर किया जा सके। इन स्टेशनों से डेटा लगभग वास्तविक समय में प्राप्त किया जाता है और क्षेत्र में सूक्ष्म और छोटे भूकंपों का पता लगाने के लिए उपयोग किया जाता है।

मैग्नेटो-टेल्यूरिक सर्वेक्षण
मंत्रालय के अनुसार दिल्ली क्षेत्र पर मैग्नेटो-टेल्यूरिक नामक एक भूभौतिकीय सर्वेक्षण किया जा रहा है। यह द्रव पदार्थ की उपस्थिति का पता लगाने में मदद करेगा, जो आमतौर पर भूकंप की आशंका को बढ़ाता है। यह सर्वेक्षण वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के सहयोग से किया जा रहा है।

अध्ययन का यह होगा लाभ-
मंत्रालय ने कहा एमटी सर्वेक्षण से प्राप्त जानकारी भूकंपीय खतरे के सटीक आकलन में उपयोगी होगी। इसका उपयोग भूकंप रोधी इमारतों, औद्योगिक इकाइयों और अस्पतालों और स्कूलों जैसे महत्वपूर्ण संरचनाओं को डिजाइन करने के लिए भी किया जा सकता है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी कानपुर के सहयोग से एनसीएस यह अध्ययन कर रहा है।
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