दुनिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात, तकनीकी बदलाव और वैश्विक व्यापार की नई चुनौतियों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था में बड़े सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक कानूनी संरचना अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और ग्लोबल साउथ की वास्तविक जरूरतों के प्रति संवेदनशील होनी चाहिए। उन्होंने यह बात संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (UNCITRAL) की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य से अलग नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि आज दुनिया अभूतपूर्व भू-राजनीतिक अस्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में व्यवधान और तेजी से बदलती तकनीक का सामना कर रही है। इन बदलावों का असर यह है कि वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और डेटा का सीमाओं के पार आवागमन प्रभावित हो रहा है। इससे कारोबार और सरकारों दोनों के सामने नए जोखिम पैदा हो रहे हैं और कोई भी देश अकेले इन चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हो सकता।
बदलती दुनिया में कानूनी व्यवस्था क्यों बदलनी जरूरी है?
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया के देश अब केवल बेहतर बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी की ही नहीं, बल्कि कानूनी स्थिरता और भरोसेमंद व्यवस्था की भी अपेक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशों को ऐसे नियम आधारित और समन्वित कानूनी ढांचे की जरूरत है, जिससे व्यापार, डेटा का प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों का पालन विभिन्न देशों और महाद्वीपों में बिना रुकावट हो सके। उनके अनुसार, बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून को भी समय के साथ विकसित होना होगा।
UNCITRAL की भूमिका पर क्या बोले जयशंकर?
जयशंकर ने कहा कि UNCITRAL समन्वित कानूनी ढांचे, प्रभावी विवाद समाधान प्रणाली और सीमा पार लेनदेन में अधिक निश्चितता लाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था से वैश्विक व्यापार और सीमा पार वाणिज्य विभिन्न व्यवधानों के बावजूद मजबूत बना रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे दुनिया का आर्थिक केंद्र बदल रहा है, वैसे-वैसे भविष्य की कानूनी व्यवस्था को अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और ग्लोबल साउथ की वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर तैयार करना होगा।
भारत ने विकसित भारत 2047 को लेकर क्या कहा?
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य मजबूत अर्थव्यवस्था, तकनीकी नवाचार, विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ गहरे जुड़ाव पर आधारित है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए ऐसी कानूनी व्यवस्था जरूरी है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और व्यावसायिक सहयोग को आसान और भरोसेमंद बनाए।
ग्लोबल साउथ के लिए भारत का क्या संदेश है?
जयशंकर ने कहा कि UNCITRAL के अगले चरण का महत्वपूर्ण उद्देश्य यह होना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून विकसित और विकासशील देशों के बीच की दूरी कम करने का माध्यम बने। उन्होंने कहा कि भविष्य की कानूनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी देशों को समान अवसर मिलें और ग्लोबल साउथ की जरूरतों को भी बराबर महत्व दिया जाए। उनके अनुसार, वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में संतुलन और स्थिरता के लिए समावेशी तथा नियम आधारित कानूनी ढांचा बेहद आवश्यक है।