कोरोना काल में युवाओं ने सबसे ज्यादा गंवाई नौकरियां
- फोटो : pixabay
आर्थिक रूप से बदहाल व्यवस्था में जुलाई महीने में ही 50 लाख लोगों को अपनी नौकरियां खोना पड़ा है। अगर आर्थिक हालात नहीं सुधरते हैं तो आगे आने वाले समय में भी भारी संख्या में लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ सकता है। सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा युवाओं को ही नौकरियां गंवानी पड़ी हैं। अप्रैल से लेकर जुलाई महीने के बीच 1.96 करोड़ ऐसे युवाओं की नौकरियां गई हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपेक्षाकृत कम अनुभवी कामगार को हटाने की कंपनियों की सोच युवाओं पर भारी पड़ी है।
युवाओं का नौकरियों में हिस्सा
सीएमआईई के मुताबिक देश में सभी नौकरी करने वालों में लोगों में 15 वर्ष से 19 वर्ष आयु वर्ग के लोगों का हिस्सा लगभग 1.5 प्रतिशत है। इस वर्ग की कम संख्या इस लिहाज से अच्छा संकेत मानी जा सकती है कि यह वर्ग स्कूली शिक्षा से जुड़ा होता है। उसके कामगर होने का अर्थ उसका शिक्षा से दूर होना है। कुल नौकरियों में 20 से 24 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों का हिस्सा इस समय 8.5 प्रतिशत के करीब है, लेकिन इस वर्ग का कुल नौकरियों में हिस्सा लगातार कम हो रहा है। 2017-18 में इस आयु वर्ग का नौकरियों में हिस्सा 9.1 फीसदी हुआ करता था जो 2018-19 में 8.5 फीसदी रह गया। अब 2019-20 में यह हिस्सा और कम होकर 8.5 फीसदी हो गया है।
लॉकडाउन के दौरान भारी संख्या में नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयु वर्ग (20-24 वर्ष) के लोगों की कुल नौकरियों में हिस्सेदारी का घटना इस बात का संकेत है कि छात्र अब उच्च शिक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। इसे एक अच्छा संकेत माना जा सकता है। लेकिन इन्होने गंवाई सबसे ज्यादा नौकरियां लेकिन इसी आयु वर्ग के युवाओं को लॉकडाउन के दौरान भारी संख्या में नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। अनुमान है कि इस आयु वर्ग के न्यूनतम 35 फीसदी युवाओं को जुलाई माह तक अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। लेकिन 25-29 आयु वर्ग के युवाओं को सबसे ज्यादा (46 फीसदी) नौकरियों को खोना पड़ा है। अप्रैल से जुलाई के बीच 40 वर्ष से कम आयु वर्ग के नौकरीशुदा लोगों में 1.96 करोड़ लोगों ने अपनी नौकरियां खोई हैं।
देश के कामकाजी वर्ग का सबसे ताकतवर हिस्सा होता है युवा
इसके बाद 25 वर्ष के आगे पांच-पांच साल के आयु वर्ग के लोगों की नौकरियों में हिस्सेदारी 11 से 15 फीसदी के बीच है। सबसे ज्यादा भागीदारी उम्र के चालीसवें दशक में चल रहे लोगों की है जो कुल नौकरियों का औसतन 14-15 फीसदी हैं। नौकरियों में छंटनी के लिहाज से यह वर्ग सबसे सुरक्षित रहा है क्योंकि अनुभव और ऊर्जा का मिश्रण यह वर्ग कंपनियों के लिए अपरिहार्य साबित हुआ है।
सीएमआईई के कंज्यूमर पिरैमिडस हाउसहोल्ड सर्वे में सबसे चिंताजनक तथ्य यह निकलकर सामने आया है कि नौकरियों में 30 वर्ष के करीब पहुंच रहे युवाओं और तीस वर्ष के दशक (31-39 वर्ष) के युवाओं की भागीदारी लगातार कम हो रही है। यह देश के कामकाजी वर्ग का सबसे ताकतवर हिस्सा होता है। इसके कमजोर होने का असर सकल उत्पादकता पर भी पड़ने की संभावना बन सकती है। यह तथ्य ये भी चिंता पैदा करता है कि देश में कुल नौकरियों के अवसर कम हो रहे हैं। इस आयु वर्ग (31-39 वर्ष) की नौकरियों में कुल भागीदारी घटने का सबसे ज्यादा मामला 2019-20 के दौरान सामने आया था।
युवाओं को नौकरी का खतरा ज्यादा क्यों?
दरअसल, कंपनियां अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए ऊपर के पदों पर ज्यादा कुशल और अनुभवी कामगरों को प्राथमिकता देती हैं। उनके नीचे कम कुशल, लेकिन ऊर्जावान युवाओं को रखा जाता है। इस प्रकार अनुभव और ऊर्जा के बेहतर संयोजन से कंपनी की उत्पादकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है। लेकिन अनुमान है कि कोरोना जैसे संकट के समय इन्हीं युवाओं पर ही नौकरियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है क्योंकि इनकी कार्यकुशलता और अनुभव 40 वर्ष या ऊपर के कामगरों की तुलना में कम होती है।