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केजरीवाल Vs उपराज्यपाल: दिल्ली सरकार के 'संकट' की पटकथा तो पहले ही लिखी जा चुकी थी, कोरोना में 'शाह' से टकराव तो बहाना है

Fri, 30 Apr 2021 04:34 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में चार मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके पूर्व विधानसभा सचिव एवं संविधान विशेषज्ञ एसके शर्मा बताते हैं, दिल्ली में चुनी हुई सरकार द्वारा 'उत्तर प्रदेश-हरियाणा' की तर्ज पर शासन करने की मंशा पाल लेना, समझो यहीं से 'संकट' की पटकथा लिखना शुरू हो गई थी...
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अनिल बैजल और अरविंद केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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कोरोना काल में दिल्ली सरकार पर मंडरा रहे संकट की पटकथा तो बहुत पहले लिखी जा चुकी थी। मुख्यमंत्री केजरीवाल अपनी शक्तियों के नाम पर उस संकट को आगे बढ़ाते रहे। संविधान से परे जाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली के उपराज्यपाल से बैर मोल ले लिया। जब अमित शाह को मौका मिला तो उन्होंने 'असंवैधानिक पंगे' का मतलब भी समझा दिया। पांच छह साल से कुछ ऐसा ही चल रहा था।

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दिल्ली में चार मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके पूर्व विधानसभा सचिव एवं संविधान विशेषज्ञ एसके शर्मा बताते हैं, दिल्ली में चुनी हुई सरकार द्वारा 'उत्तर प्रदेश-हरियाणा' की तर्ज पर शासन करने की मंशा पाल लेना, समझो यहीं से 'संकट' की पटकथा लिखना शुरू हो गई थी। केजरीवाल सरकार ने उन बंदिशों को तोड़ना चाहा, जिनका उल्लेख भारत के संविधान में, बहुत स्पष्ट भाव के साथ देखने को मिलता है। नतीजा, दिल्ली में कोरोना की दूसरी लहर जब कहर बरपा रही है तो केंद्र ने वह कानून लागू कर दिया, जिसके तहत दिल्ली सरकार का मतलब 'उपराज्यपाल' होगा।

दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर आगे बढ़ने लगी दिल्ली सरकार

एसके शर्मा ने बताया, दिल्ली एक केंद्रशासित प्रदेश है। जिस तरह पुडुचेरी में यह मांग आई कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि भी सरकार में होने चाहिए, वैसे ही दिल्ली में एक सिस्टम बना दिया गया। विधानसभा का गठन कर एलजी की सलाह से शासन करने की प्रथा शुरू हो गई। पिछले कुछ वर्षों से अनुच्छेद 239 के तहत सरकार चलाने का प्रयास हुआ। जिस तरह से पंजाब, हरियाणा या उत्तर प्रदेश में सरकारें काम करती हैं, उन्हीं की तर्ज पर दिल्ली सरकार आगे बढ़ने लगी।

उपराज्यपाल यानी 'एलजी', जिन्हें केंद्र और राष्ट्रपति का नुमाइंदा कहा जाता है, उनके साथ टकराव होने लगा। जब से दिल्ली में विधानसभा का गठन हुआ, तभी से उस पर दो तरह की बंदिशें लगा दी गईं। जमीन, पुलिस, कानून व्यवस्था और सर्विसेज यानी सेवा, इन चार विषयों से विधानसभा का कोई दखल नहीं होगा। लिहाजा, केंद्र शासित प्रदेश की अपनी कोई सेवा नहीं होती, इसलिए राजनिवास से इन चारों विषयों का संचालन होगा। इन पर विधानसभा, उपराज्यपाल को राय नहीं देगी, भले ही वह मानें या न मानें।

बाकी विषयों के लिए एडवांस में केंद्र की अनुमति लेनी होगी

बतौर एसके शर्मा, बाकी विषयों पर दिल्ली विधानसभा कानून बना सकती है। राज्य या समवर्ती सूची वाले विषयों पर भी कानून बनाने का अधिकार है। इसके लिए एडवांस में केंद्र की अनुमति लेनी होती है। 'आप' सरकार से पहले दिल्ली में जो सरकारें रही हैं, वे कानून बनाने से पहले केंद्र की अनुमति लेती थीं, इसलिए उनका केंद्र के साथ विवाद नहीं हुआ। कई मसलों पर केंद्र, एलजी और राष्ट्रपति तक का अपमान हुआ। लोकपाल के बिल को लेकर जो कुछ हुआ, वह सभी ने देखा है। अब केंद्र ने 239ए के तहत विधानसभा, एलजी और सीएम को छोड़कर बाकी विषयों के लिए कानून बना दिया।

दिल्ली की सरकार को अब कोई भी कार्यकारी फैसला लेने से पहले उपराज्यपाल की अनुमति लेनी होगी। एनसीटी सरकार (संशोधन) अधिनियम 2021 को लागू कर दिया गया है। आप सरकार से पहले जब विधानसभा में बिल पेश होता था तो 239ए के अंतर्गत एलजी का नाम आता था। बाद में दिल्ली सरकार ने विधान सभा कार्यवाही के इस हिस्से से उपराज्यपाल शब्द ही हटा दिया। इससे तकरार बढ़ती चली गई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के साथ उपराज्यपाल लिखा जाने लगा। जब सवाल उठने लगे तो सरकार का अर्थ ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की मंत्री परिषद’ लिखना शुरू कर दिया।

संविधान के अनुसार चलें तो नहीं होगा टकराव

पूर्व विधानसभा सचिव एसके शर्मा कहते हैं कि अगर संविधान के मुताबिक चलें तो केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच टकराव नहीं होगा। संविधान ने जो शक्ति एलजी को दी है, उसे छीनिए मत। मौजूदा सरकार को सभी तरह के नियम देख लेने चाहिएं। यहां दिक्कत इसलिए आ रही है कि पर्दे के पीछे से मनमर्जी वाले नियम लागू किए जा रहे हैं। विधानसभा का सत्र आप अपनी मनमर्जी से बुला रहे हैं। उसे बीच में तोड़ देते हैं। कभी ऐसा नियम बना देते हैं कि विधानसभा सत्र का सत्रावसान ही न हो। पूर्व पीएम राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने का प्रस्ताव पास कर देते हैं। जो बातें नहीं हो सकतीं, वे प्रस्ताव पास कर जनता को गुमराह किया जाता है। बाद में जब वे प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास जाते हैं तो वहां उन्हें कूड़े के डिब्बे में फैंक देते हैं। उनका तर्क यह रहता है कि वह संविधान के अनुरुप नहीं है।

अफसरों को अपमानित करने का ये तरीका ढूंढ निकाला ...

दिल्ली सरकार के अनेक अफसर जो नियमानुसार काम करना चाह रहे थे तो उन्हें अपमानित करना शुरू कर दिया गया। एक अधिकारी के मुताबिक, जब अफसरों पर दिल्ली सरकार अपना नियंत्रण नहीं कर पाई तो अफसरों को प्रताड़ित करने का दूसरा तरीका निकाल लिया। चूंकि विधानसभा समितियों के पास भी सदन की तरह विशेषाधिकार होते हैं, वहां अफसरों को बुलाकर डांट फटकार मारी जाती है। अफसरों ने इस बाबत कई बार केंद्रीय गृह मंत्रालय से शिकायत की थी। इसका नतीजा यह हुआ कि अब केंद्र ने संसद के जरिए एनसीटी सरकार (संशोधन) अधिनियम 2021 को लागू कर दिया गया है। इसमें चुनी हुई सरकार के ऊपर उपराज्यपाल को प्रधानता दी गई है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक अधिनियम के प्रावधान 27 अप्रैल से लागू हो गए हैं।
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दिल्ली सरकार और एलजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला

दिल्ली में जनता की चुनी हुई सरकार के मुकाबले उपराज्यपाल को ज्यादा अधिकार दे दिए गए हैं, इस लाइन को बहुत से लोग अपने तरीके से परिभाषित करने लगते हैं। कोई इसे राजनीतिक चश्मे से देखता है तो कोई संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देता है। संविधान के अनुच्छेद 239 और 239AA की व्याख्या को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच शुरू से ही मतभेद रहा है।

अनुच्छेद 239 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है जिनमें उनके अधिकार एवं सीमाएं वर्णित हैं। दिल्ली के लिए विशेष तौर पर 239AA जोड़ा गया है। इसका मतलब हुआ कि 239AA के प्रावधानों की व्याख्या उपराज्यपाल अपनी समझ के अनुसार करेंगे और केजरीवाल सरकार उसे अपने तरीके से समझेगी। इस मुद्दे पर साल 2018 में उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था, अनुच्छेद-239AA आखिर एक लोकतांत्रिक प्रयोग था। इसकी व्याख्या से ही तय होगा कि ये सफल रहा या नहीं। तो इसकी व्याख्या क्या है। इसमें दिल्ली को अन्य केंद्रशासित राज्यों से अलग दर्जा मिला है। इसमें यह भी लिखा है कि इसके तहत दिल्ली में चुनी हुई सरकार होगी, जो जनता के लिए जवाबदेह होगी। उच्चतम न्यायालय ने इनको रेखांकित कर दिया है। दिल्ली के उपराज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 239AA के प्रावधानों को छोड़कर अन्य मुद्दों पर निर्वाचित सरकार की सलाह पर काम करें।
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