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संसद सत्र में 18 सांसदों ने पूछा 'मुर्गे' का हालचाल, साथ ही पूछा सरकार ने कितना दिया मुआवजा?

Fri, 19 Feb 2021 03:31 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉ. संजीव कुमार बालियान ने सांसदों को बताया, शीतकाल के दौरान प्रवासी पक्षियों के आगमन के कारण मुर्गों की निगरानी के लिए पहले ही एडवायजरी जारी कर दी गई थी। बर्ड फ्लू के नियंत्रण के लिए राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए गए...
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बर्ड फ्लू - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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संसद सत्र के दौरान विभिन्न विषयों से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। मौजूदा सत्र में कोई सदस्य कश्मीर को लेकर चिंतित रहा तो कोई चीन सीमा पर चल रहे विवाद के विषय में कुछ जानना चाह रहा था। कई दूसरे सदस्यों ने बैंकिंग सेक्टर, किसान आंदोलन और अन्य ज्वलंत मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे। प्रश्नकाल के बीच लोकसभा के 18 सांसदों ने एक जैसा सवाल पूछा। वह सवाल 'मुर्गे' से संबंधित था।

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सांसदों ने देश के मुर्गों का हालचाल जाना। कितने बेगुनाह मुर्गे खत्म कर दिए गए। नुकसान, कहां पर और कितना हुआ है। केंद्र और राज्यों की सरकारों ने कितनी आर्थिक मदद दी है, लोकसभा में ऐसे ही कई सवाल पूछे गए। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने 'मुर्गे' से संबंधित तमाम सवालों का जवाब दे दिया। उन्होंने यह भी बताया कि 11 लाख से ज्यादा मुर्गों को किसने और क्यों मारा है।

लोकसभा सांसद मनोज कोटक, रमेश विधूड़ी, कुरुवा गोरांतला माधव, पीपी चौधरी, कुमारी प्रतिमा मलिक, प्रो. अच्युतानंद सामंत, डॉ. रामशंकर कठेरिया, श्रीधर कोटागिरी, चिंता अनुराधा, क्वीन ओझा, के. सुब्बानारायण, नायब सिंह सैनी, डॉ. भारतीबेन डी श्याल, अर्जुन लाल मीणा, पोचा ब्रहमानंद रेड्डी, एन रेड्डप्प, एससी उदासी और शंकर लालवानी ने 9 फरवरी को यह सवाल पूछा था।
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इनके सवालों की फेहरिस्त लंबी थी। सांसदों ने पूछा, एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस से प्रभावित राज्यों की संख्या कितनी है। सरकार ने इस फ्लू के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए क्या उपाय किए हैं। मुर्गे पालने वालों को कितना नुकसान हुआ है। बीमारी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कितने मुर्गों को मारा गया है। इनके मालिकों को सरकार की ओर से कितना मुआवजा दिया गया है।

डॉ. संजीव कुमार बालियान ने सांसदों को बताया, शीतकाल के दौरान प्रवासी पक्षियों के आगमन के कारण मुर्गों की निगरानी के लिए पहले ही एडवायजरी जारी कर दी गई थी। बर्ड फ्लू के नियंत्रण के लिए राज्यों को दिशा निर्देश जारी किए गए। वॉटर बॉडी, जीवित पक्षी बाजार, चिड़ियाघर और पोल्ट्री फार्मों के समीप निगरानी बढ़ा दी गई। आवश्यक पीपीई किट, सहायक उपकरण, कीटाणुनाशकों तथा अन्य लॉजिस्टिक का पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा गया। जिन फार्मों पर अंडे या मुर्गे के आहार को नष्ट किया गया है, उनके मालिकों को मुआवजा देने के लिए निधियों की व्यवस्था की गई है। केंद्रीय नियंत्रण भी स्थापित किया गया था।

एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस से अभी तक 95181 पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो चुकी है, जबकि 336120 पोल्ट्री पक्षियों को मारा गया है। साल 2015 से 2020 के दौरान केरल, कर्नाटक, ओडिशा, तेलंगाना, मणिपुर, झारखंड, मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, गुजरात, यूपी, पंजाब, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और दमन प्रशासन ने एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस की सूचना दी है।

इस अवधि में 1132865 मुर्गों को मारने की जानकारी मिली है। मौजूदा वित्त वर्ष में पशु रोग नियंत्रण के तहत राज्यों को 160.11 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। भारत सरकार ने देश में एवियन इन्फ्लुएंजा के लिए किसी भी टीके के उपयोग की अनुमति नहीं दी है।

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