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प्रतिबंधित फेंसेडिल के आगे लॉकडाउन बेअसर, ‘नशे की शीशी’ रोज पहुंचती है बांग्लादेश

Wed, 08 Apr 2020 06:48 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आराम से चलता आ रहा है तस्करी का धंधा
  • प्रतिबंधित कफ सिरप का होता है नशे के लिए इस्तेमाल
  • लॉकडाउन में दक्षिण बंगाल फ्रंटियर पर रोजाना पकड़ी जा रही है फेंसेडिल... 
  • पहले एक शीशी का दाम 300-500 टका था, अब कीमत 1,200 से ज्यादा हो गई
  • पश्चिम बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों में भी तैयार होती है फेंसेडिल
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Phensedyl - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कोरोना लॉकडाउन में दवा को सरहदों के पार जाने को मिले तो ये अच्छी बात है, लेकिन अगर लॉकडाउन की सख्ती के बावजूद नशे के लिए इस्तेमाल की जा रही दवा सरहदों से आर-पार जाती रहे तो आश्चर्य होना लाजिमी है। भारत से अवैध रूप से एक प्रतिबंधित दवा पुराने चलन के मुताबिक अभी भी बदस्तूर बांग्लादेश पहुंच रही है।
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नाम है उसका फेंसेडिल। दवा की मांग इतनी ज्यादा है कि लॉकडाउन तोड़कर तस्कर यह दवा बांग्लादेश बॉडर तक पहुंचाने का जोखिम उठा रहे हैं। बॉर्डर के करीब उनका बदकिस्मती से अगर सामना बीएसएफ से हो गया तो अलग बात है, नहीं तो हमेशा की तरह दवा बॉडर पार और उनकी पौ बारह।
 

भारत की तरह बांग्लादेश में भी कोरोना का संक्रमण फैल रहा है। यह बात अलग है कि बांग्लादेश में अभी कोरोना के केस 164 हैं। भारत में लॉकडाउन की तमाम पाबंदियां पार करते हुए प्रतिबंधित फेंसेडिल बांग्लादेश के लोगों को नशे में झूमने का मजा देने के लिए तस्करों द्वारा पहुंचाई जा रही है।

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भारत में 2016 से प्रतिबंधित इस दवा का कोरोना की लड़ाई से कोई लेना देना नहीं है। यह दवा खांसी ठीक करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों और दूसरी जगहों पर इस दवा की भारी मांग है। मर्ज ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि नशे के लिए इसका इस्तेमाल होता है।
 

भारत में इस दवा की कीमत करीब 155 रुपए बताई गई है, जबकि बांग्लादेश में पहले पांच सौ टका थी, अब 1000-1200 टका तक पहुंच गई है। बीएसएफ के एक अधिकारी के अनुसार, सीमा पार के इलाकों में तो फेंसेडिल की खाली शीशी भी पचास रुपए की बिकती है। कई जगह पर लोग उसमें गर्म पानी डालकर पीते हैं। उन्हें इसी में नशे का अहसास होता है।

आराम से चलता आ रहा है तस्करी का धंधा

भारत में लॉकडाउन के बावजूद फेंसेडिल के तस्कर रोजाना सीमा पर पहुंच रहे हैं। वे इस फिराक में रहते हैं कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर जहां से मौका मिले, दवा बांग्लादेश पहुंचा दी जाए। सीमा तक यह दवा लाने के लिए तस्कर ऐसे-ऐसे तरीके अपनाते हैं, जिनका इस्तेमाल पहले कभी देखने या सुनने में नहीं आया।

बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश से हमें यह सूचना मिलती है कि पश्चिम बंगाल के कई जिलों में फेंसेडिल बनाने की फैक्ट्री लगी हैं। हम यह बात जिला अधिकारियों तक पहुंचा देते हैं। हालांकि इसका कोई फर्क नहीं पड़ता।

लॉकडाउन में दक्षिण बंगाल फ्रंटियर पर रोजाना पकड़ी जा रही है फेंसेडिल

पश्चिम बंगाल की जो सीमा बांग्लादेश के साथ लगती है, उसे बीएसएफ वाले दक्षिण बंगाल फ्रंटियर का नाम देते हैं। इस इलाके में सात अप्रैल को 42 हजार रुपये की कीमत की फेंसेडिल, जो 277 शीशी में भरी गई थी, जब्त की गई हैं।

पांच अप्रैल को 1450 शीशी,  4 अप्रैल को 397,  3 अप्रैल को 217, 2 अप्रैल को 407  और पहली अप्रैल को 1105 शीशी फेंसेडिल पकड़ी गई। इसी तरह 31 मार्च को 274, 30 को 406, 29 मार्च को 452, 28 को 1160, 26  को 286 और 25 मार्च को फेंसेडिल की 1283 शीशियां जब्त की गई हैं।

बांग्लादेश की एक एजेंसी के अनुसार, 2019 में फेंसेडिल की 7,79,214 और 2018 में 7,15,529 शीशी पकड़ी गई थी। यह दवा अब बांग्लादेश के अलावा म्यांमार तक पहुंचने लगी है। इसकी मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले एक शीशी का दाम 300-500 टका था, अब उसकी कीमत 1,200 से ज्यादा हो गई है।

चूंकि बांग्लादेश में इस दवा पर अधिक कड़ाई से प्रतिबंध है, इसलिए भारत में इसका निर्माण कर तस्करों द्वारा उसे वहां तक पहुंचाया जाता है। अधिकारी के अनुसार, लॉकडॉउन में भी इसकी सप्लाई बंद नहीं हो पा रही है।

2016 में, भारत ने लगभग 350 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं के उत्पादन और विपणन पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसमें कफ सिरप फेंसेडिल भी शामिल था।

पश्चिम बंगाल के अलावा दूसरे राज्यों में भी तैयार होती है फेंसेडिल

अक्तूबर 2019 में प्रयागराज के निकट फेंसेडिल की 20 हजार शीशी पुलिस ने बरामद की थी। फेंसेडिल को ट्रक पर लादकर कोलकाता ले जाया जा रहा था। जुलाई 2018 के दौरान बरेली में भी ऐसे मामले सामने आए हैं।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने यहाँ छापेमारी की थी। नवंबर 2017 में दिल्ली सरकार के ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था जो दिल्ली से बांग्लादेश और म्यांमार में अवैध रूप से फेंसेडिल कफ सिरप पहुंचा रहे थे।

बांग्लादेश के नारकोटिक्स कंट्रोल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मेघालय के तुरा क्षेत्र, पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर, बेरहामपुर, मालदा और फलकटा आदि इलाकों में फेंसेडिल के अवैध कारखाने हैं। 

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