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शीर्ष नेताओं की झिझक ने बनाई रक्षा मंत्री पद पर निर्मला की राह आसान

Thu, 07 Sep 2017 11:38 PM IST
संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
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Nirmala Sitharaman
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महिला मंत्री के रूप में पहली दफा रक्षा मंत्रालय का पद संभालने वाली निर्मला सीतारमण को विभाग मिलने की पहेली सियासी गलियारे में अबूझ बनी हुई है। निर्मला को रक्षा मंत्रालय का जिम्मा कैसे मिला इसको जानने का कौतूहल सबके मन में है।
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हो भी क्यों न दिग्गजों को पीछे छोड़ निर्मला इस पद पर पहुंचने में कामयाब रही हैं। जिसकी उन्हें कभी उम्मीद भी न होगी। बताया जा रहा है कि निर्मला को रक्षा मंत्री बनाने के मामले में पीएम मोदी ने न सिर्फ मीडिया बल्कि सरकार के शीर्ष मंत्रियों तक को चैंकाने का कार्य किया है।

पढ़ेंः- दो दिन तक रक्षा मंत्री का पद नहीं संभालेंगी निर्मला, जेटली ने बताई वजह

निर्मला को विभाग मिलने तक किसी भी मंत्री को इस बात का आभास नहीं था कि उन्हें रक्षा मंत्रालय सरीखा अहम विभाग मिलेगा। वह भी ऐसे समय में जब उन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की चर्चाएं जोरों पर थी।
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कहा जा रहा है कि शीर्ष नेताओं के झिझक ने इस पद पर निर्मला की राह आसान की है। उनको ये मंत्रालय दिलाने का श्रेय कुछ लोग वित्त मंत्री अरुण जेटली को दे रहे हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि जेटली तक को भनक नहीं थी कि निर्मला को रक्षा मंत्रालय सरीखा अहम विभाग दिया जायेगा।

पढ़ेंः- रक्षामंत्री का पद संभालते ही निर्मला सीतारमण का पूर्व सैनिकों को तोहफा, जारी किया फंड

कुछ यूं हुई निर्मला की राह आसान
वैसे तो मंत्रियों को विभाग बांटने का मामला पीएम का अपना व्यक्तिगत अधिकार है लेकिन बताया जा रहा है कि विस्तार से पहले पीएम मोदी ने सरकार के शीर्ष मंत्रियों राजनाथ, सुषमा, गडकरी और जेटली से रक्षा मंत्री के नाम के साथ अन्य अहम मंत्रालयों के लिए नाम मांगा था।

परंतु झिझक की वजह से कुछ वरिष्ठ मंत्री रक्षा विभाग के लिए पीएम के सामने अपने नाम का प्रस्ताव नहीं रख पाए। अधिकांश ने इस विभाग के लिए पीएम को कहा कि वे अपने विवेक से तय करें। जबकि इन्ही मंत्रियों ने अन्य अहम विभागों के लिए पीएम को अपनी पसंद के नामों से उन्हें अवगत कराया। कहा जा रहा है कि शीर्ष मंत्रियों के झिझक की वजह से रक्षा मंत्री के रूप में निर्मला का चयन करने में पीएम की राह आसान हो सकी है।

राजनाथ के घर हुई बैठक का नहीं रक्षा मंत्री के चयन से कुछ लेना

राजनाथ सिंह और निर्मला सीतारमण - फोटो : ANI
1 सितम्बर को गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर सम्पन्न हुई बैठक को सरकार के रक्षा मंत्री के चयन से जोड़ कर देखा गया। मगर सरकार के एक शीर्ष नेता का कहना है कि इस बैठक में रक्षा मंत्री या मंत्रिमंडल विस्तार पर कोई चर्चा नहीं हुई। पीएम मोदी ने अपने चारों वरिष्ठ मंत्रियों की राय इस मामले पर पहले ही ले ली थी।

एक-एक कर उन्होंने चारों मंत्रियों से रक्षा मंत्रालय समेत अहम विभागों के लिए चेहरों की राय मांगी थी। उन्होंने किसी भी मंत्री से व्यक्तिगत रूप से यह नहीं कहा कि वे उसे रक्षा मंत्री बनने की सोच रहे हैं।

यही वजह रही कि किसी भी मंत्री ने इस पद के लिए अपनी मनसा नहीं जताई। बल्कि अधिकांश मंत्रियों ने इस मामले में जिम्मा पीएम पर छोड़ दिया। पीएम के आगे अपना नाम चलाने को लेकर शीर्ष मंत्रियों में बड़े स्तर पर झिझक रही।

​यही वजह रही कि इस पद के लिए निर्मला के नाम का चयन करने में पीएम मोदी को भी कोई बड़ी कवायद नहीं करनी पड़ी। हालांकि निर्मला के जरिए रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद कई मंत्री मन मसोस रहे हैं। अब उन्हें लग रहा है कि वे अपना नाम आगे किए होते तो उनकी लॉटरी निकल जाती।
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निर्मला के चयन में साउथ का होना रहा बड़ा आधार

nirmala sitaraman
रक्षा मंत्री के पद पर निर्मला के चयन की वजह चाहे जो भी हो पर इस पद पर उनके चयन का बड़ा आधार उनका साउथ से संपर्क होना रहा। बताया जा रहा है कि वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति बनाये जाने के बाद से भाजपा को साउथ के लिए एक बड़े चेहरे की दरकार थी।

अब निर्मला साउथ में भाजपा का चेहरा होंगी। पार्टी ने उनके चेहरे के जरिये वेंकैया नायडू की अनुपस्थिति से होने वाले खामियाजे की भरपाई की रणनीति बनाई है। निर्मला के जरिये भाजपा ने आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु दोनों ही प्रदेशों को राजनीतिक संदेश दिया है।

एक ओर निर्मला खुद तमिलनाडु की रहने वाली हैं तो उनके पति आंध्र प्रदेश से हैं। इसके अलावा पीएम मोदी ने निर्मला के जरिये महिला सशक्तिकरण के मामले में भी बड़ा सन्देश दिया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पीएम मोदी की परीक्षा में निर्मला सफल रहतीं हैं तो भविष्य में कभी तमिलनाडु में पार्टी की संभावना बनने पर वे मुख्य्मंत्री भी बन सकती हैं।

5 अहम मंत्रियों में शुमार होने के बावजूद भी कद में रहेगी कमी
रक्षा मंत्री बनने के बाद निर्मला सीतारमण बेशक सरकार के टॉप 5 मंत्रियों की श्रेणी में शुमार हो गई हैं लेकिन उन्हें वो अहमियत नहीं मिलेगी जो कि वेंकैया नायडू को प्राप्त थीं। बताया जा रहा है कि जेटली, राजनाथ, सुषमा और गडकरी ही सरकार के कोर समूह का चेहरा रहेंगे। कोर समूह सरकार के अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए वरिष्ठ मंत्रियों का अनौपचारिक समूह है।
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