महिला मंत्री के रूप में पहली दफा रक्षा मंत्रालय का पद संभालने वाली निर्मला सीतारमण को विभाग मिलने की पहेली सियासी गलियारे में अबूझ बनी हुई है। निर्मला को रक्षा मंत्रालय का जिम्मा कैसे मिला इसको जानने का कौतूहल सबके मन में है।
हो भी क्यों न दिग्गजों को पीछे छोड़ निर्मला इस पद पर पहुंचने में कामयाब रही हैं। जिसकी उन्हें कभी उम्मीद भी न होगी। बताया जा रहा है कि निर्मला को रक्षा मंत्री बनाने के मामले में पीएम मोदी ने न सिर्फ मीडिया बल्कि सरकार के शीर्ष मंत्रियों तक को चैंकाने का कार्य किया है।
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निर्मला को विभाग मिलने तक किसी भी मंत्री को इस बात का आभास नहीं था कि उन्हें रक्षा मंत्रालय सरीखा अहम विभाग मिलेगा। वह भी ऐसे समय में जब उन्हें मंत्री पद से हटाए जाने की चर्चाएं जोरों पर थी।
कहा जा रहा है कि शीर्ष नेताओं के झिझक ने इस पद पर निर्मला की राह आसान की है। उनको ये मंत्रालय दिलाने का श्रेय कुछ लोग वित्त मंत्री अरुण जेटली को दे रहे हैं। लेकिन सूत्र बताते हैं कि जेटली तक को भनक नहीं थी कि निर्मला को रक्षा मंत्रालय सरीखा अहम विभाग दिया जायेगा।
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कुछ यूं हुई निर्मला की राह आसान
वैसे तो मंत्रियों को विभाग बांटने का मामला पीएम का अपना व्यक्तिगत अधिकार है लेकिन बताया जा रहा है कि विस्तार से पहले पीएम मोदी ने सरकार के शीर्ष मंत्रियों राजनाथ, सुषमा, गडकरी और जेटली से रक्षा मंत्री के नाम के साथ अन्य अहम मंत्रालयों के लिए नाम मांगा था।
परंतु झिझक की वजह से कुछ वरिष्ठ मंत्री रक्षा विभाग के लिए पीएम के सामने अपने नाम का प्रस्ताव नहीं रख पाए। अधिकांश ने इस विभाग के लिए पीएम को कहा कि वे अपने विवेक से तय करें। जबकि इन्ही मंत्रियों ने अन्य अहम विभागों के लिए पीएम को अपनी पसंद के नामों से उन्हें अवगत कराया। कहा जा रहा है कि शीर्ष मंत्रियों के झिझक की वजह से रक्षा मंत्री के रूप में निर्मला का चयन करने में पीएम की राह आसान हो सकी है।