भाजपा सांसद श्यामा चरण गुप्त ने खुली नाराजगी भले ही बेटे और पत्नी को टिकट न मिलने के बाद पहली बार जाहिर की हो लेकिन पार्टी के साथ उनके संबंध लंबे समय से असहज चल रहे हैं। नए प्रकरण के बाद अब यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि आखिर कितने दिनों तक पार्टी और श्यामा चरण गुप्त दोनों एक दूसरे को बर्दाश्त करेंगे। भाजपा नेता भले अभी इस विषय में कुछ न बोल रहे हों लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद सांसद के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई से इंकार भी नहीं कर रहे।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले तक सपा के साथ रहे श्यामा चरण गुप्त को भाजपा ने स्थानीय चुनावी गणित को देखते हुए टिकट तो दे दिया लेकिन सरकार बनने के कुछ ही दिनों के बाद दोनों के रिश्तों में खींचतान शुरू हो गई। करीब डेढ़ वर्ष पहले भाजपा सांसद एवं मेनका गांधी के पुत्र सांसद वरुण गांधी को प्रदेश में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की चर्चा गरम हुई तो उस दौरान श्यामा चरण ने यह तक कह दिया था कि अगर वरुण गांधी मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकते हैं तो मेरा बेटा क्यों नहीं, वह भी सांसद का पुत्र है।