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विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं भाजपा सांसद श्यामा चरण गुप्त

Mon, 30 Jan 2017 08:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : social media
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भाजपा सांसद श्यामा चरण गुप्त ने खुली नाराजगी भले ही बेटे और पत्नी को टिकट न मिलने के बाद पहली बार जाहिर की हो लेकिन पार्टी के साथ उनके संबंध लंबे समय से असहज चल रहे हैं। नए प्रकरण के बाद अब यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि आखिर कितने दिनों तक पार्टी और श्यामा चरण गुप्त दोनों एक दूसरे को बर्दाश्त करेंगे। भाजपा नेता भले अभी इस विषय में कुछ न बोल रहे हों लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद सांसद के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई से इंकार भी नहीं कर रहे।
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वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले तक सपा के साथ रहे श्यामा चरण गुप्त को भाजपा ने स्थानीय चुनावी गणित को देखते हुए टिकट तो दे दिया लेकिन सरकार बनने के कुछ ही दिनों के बाद दोनों के रिश्तों में खींचतान शुरू हो गई। करीब डेढ़ वर्ष पहले भाजपा सांसद एवं मेनका गांधी के पुत्र सांसद वरुण गांधी को प्रदेश में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा बनाने की चर्चा गरम हुई तो उस दौरान श्यामा चरण ने यह तक कह दिया था कि अगर वरुण गांधी मुख्यमंत्री का चेहरा हो सकते हैं तो मेरा बेटा क्यों नहीं, वह भी सांसद का पुत्र है। 
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श्यामा चरण को नोटबंदी भी रास नहीं आई

18 दिसंबर 2016 को सिविल लाइंस में हुई व्यापारिक गोष्ठी में उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ खुलकर अपनी बात रखी थी और कहा था कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कारोबार काफी अधिक प्रभावित हुआ। छोटे व्यापारियों का धंधा चौपट हो रहा है। योजना का ठीक ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो रहा। उन्होंने यह भी कहा था कि व्यापारी होने के नाते उनका दर्द अच्छी तरह समझता हूं। 

इसके पहले अप्रैल 2015 में भी श्यामा चरण ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर तंबाकू उत्पादों के पैकेटों पर लिखा होता है कि इसके इस्तेमाल से कैंसर हो सकता है तो फिर चीनी और चावल के पैकेटों पर भी लिखा होना चाहिए कि इससे डायबिटीज हो सकती है। इस प्रकरण में भी भाजपा उनके साथ खड़ी नहीं दिखाई दी थी। भाजपा के महानगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता का कहना है कि इस मामले में कोई भी निर्णय प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व को लेना है।



जून 2016 में भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद सांसद श्यामा चरण गुप्त को केंद्रीय मंत्री बनाने की चर्चा जोरों से हुई। यह चर्चा जैसे-जैसे तेज हुई, उनके घर के बाहर समर्थकों की भीड़ जुट गई। काफी नेता और बड़े व्यापारी उन्हें बधाई तक देने पहुंच गए। हालांकि उस दौरान उन्होंने यह कहा था कि मंत्री बनाए जाने की उनके पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
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