चिलचिलाती गर्मी और फैनी तूफान के कारण जहां देश में मौसम का हाल बेहाल है वहीं एक ताजा जारी रिपोर्ट ने लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। कहा जा रहा है कि 2019 पिछले 119 वर्षों का सबसे गर्म साल साबित होगा। महाराष्ट्र के अकोला में तो तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
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नेशनल सेंटर फॉर एनवायरमेंटल इन्फॉर्मेशन की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2019 में विश्व स्तर पर जमीन और समुद्र के तापमान में 0.87 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी देखी गई है। बढ़ते तापमान का असर न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर नजर आने लगा है, बल्कि ये स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद गंभीर है।
अलनीनो प्रभाव बढ़ा
अलनीनो पर पड़े मौसम के प्रभाव के कारण प्रशांत महासागर की सतह पर तापमान 0.5 डिग्री तक बढ़ा है। देश में इस साल मानसून सामान्य के करीब रहेगा। भारत मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश ने सोमवार को बताया कि इस वर्ष मानसून दीर्घकाल औसत (एलपीए) के 96 फीसदी रहने की संभावना है, जो कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है।
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अल-नीनो समुद्री हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में वृद्धि में विशेष भूमिका निभाती है। अल-नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि इससे वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है।
बारिश में कमी का सामना करेंगे भारत के ये राज्य
Heat waves
भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस बार मानसून के पहले होने वाली बारिश 59.6 मिमी रिकॉर्ड की गई है। यह औसत से 27 फीसदी कम है। मध्य और पूर्वी भारत के किसानों को इससे सबसे ज्यादा नुकसान होगा। जिन्हें जून में बुआई के मौसम में पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। पहले से ही यहां के किसान मानसून पूर्व बारिश में आई कमी का सामना कर रहे हैं। इसका असर भारत के फसल पैदावार पर भी पड़ेगा।
अरुणाचल प्रदेश सहित पूर्वोत्तर के कई राज्यों को इस बार बारिश में आई कमी का सामना करना पड़ेगा। जबकि ऐसी ही स्थिति पूर्वी उत्तर प्रदेश, हिमाचल, जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बनेगी। मौसम विभाग के अनुसार, बारिश में आई कमी से देश के कई हिस्से शुष्क गर्मी की चपेट में रहेंगे।
इसके अलावा यह भी पूर्वानुमान लगाया गया है कि इस दौरान राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्यप्रदेश, झारखंड और ओडिशा में गर्म हवाएं लोगों को ज्यादा परेशान करेंगी।
तप रहा है मध्यप्रदेश
तापमान
- फोटो : सोशल मीडिया
मध्यप्रदेश के खरगोन शहर ने गर्मी के मामले में दुनियाभर के तमाम शहरों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस शहर का तापमान 47 डिग्री तक पहुंच गया है, जिसके कारण शहर भट्टी की तरह तप रहा है। तेज धूप और भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल हो गया है। लू के थपेड़े के बीच दिन में सड़कों पर सन्नाटा सा छा जाता है।
देश के 13 सबसे गर्म शहरों में मध्यप्रदेश के 5 शहर, खरगोन, खंडवा, होशंगाबाद, खजुराहो और नौगांव शामिल हैं। मौसम विभाग की सूची में दुनिया के 15 सबसे गर्म शहरों में भारत के 13 शहर शामिल हैं। आईएमडी ने 1901 से लेकर अब तक 2019 को सबसे गर्म साल घोषित किया है। इस साल गर्मी पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। महाराष्ट्र के नागपुर को गर्मी के मामले में दुनिया के नौवें नंबर पर रखा गया है। नागपुर में पारा 45.2 रहा।
मौसम विभाग के अनुसार अनुमान जताया जा रहा है कि फिलहाल इन शहरों का तापमान 45-47 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक सबसे अधिक गर्मी मध्य भारत के लोगों को झेलनी पड़ेगी। वहीं विभाग ने यह भी बताया कि 0.5 डिग्री सेल्सियस का तापमान इस वर्ष बढ़ सकता है।
इन कारणों से मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी
Temperature in Delhi
अरब सागर में विपरीत हवा के चक्रवात बनने के कारण गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश की तरफ नमी नहीं आ रही है। 1.5 किलोमीटर उपर बने इस चक्रवात का एक्सटेंशन 6 से 7 किलोमीटर उपर तक है। आसमान में बादल न होने से सूर्य का रेडिएशन भी ज्यादा हो रहा है। जिससे धरती गर्म हो रही है। जमीन से लगभग एक किलोमीटर उपर तक हवा के उपरी हिस्से में चक्रवात बन रहा है।
चेन्नई में स्थित माैसम केंद्र ने बंगाल की खाड़ी में फैनी चक्रवात काे लेकर अलर्ट जारी किया। यह चक्रवात वर्तमान में चेन्नई से करीब 1200 किमी दक्षिण-पूर्व में केंद्रित है हालांकि इसका केंद्र लगातार बदल रहा है। लेकिन, मध्य भारत पर इसका कोई असर नहीं होगा। जिससे गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं है।
ग्लोबल वॉर्मिंग का प्रभाव
भू वैज्ञानिकों ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और हिमालय में ग्लेशियर की संख्या लगातार कम हो रही है। नतीजन समुद्र का जल स्तर बढ़ता जा रहा है। इससे कई तटीय शहरों के समुद्र में समा जाने का खतरा बढ़ रहा है। मौसम में बदलाव के कारण देश में कहीं बाढ़ तो कहीं सूखे की स्थिति पैदा हो रही है।
ग्लोबल वार्मिग के कारण डूब रहा है जकार्ता
जकार्ता
- फोटो : सोशल मीडिया
इंडोनेशिया की ये मौजूदा राजधानी दुनिया में सबसे तेजी से डूबते शहरों में से एक है। दरअसल इंडोनेशिया दलदली जमीन के किनारे पर बसा है, जहां 13 नदियां एक दूसरे को काटती हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस शहर का बड़ा हिस्सा साल 2050 तक डूब सकता है। उत्तरी जकार्ता हर साल औसतन 1-15 सेंटीमीटर डूबता जा रहा है।
पीने के पानी में कमी
धरती पर तेजी से बढ़ रहे पेयजल संकट को दूर करने के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। फिर भी यह समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। भूगर्भ जल के अत्याधिक दोहन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। इस समस्या के गंभीरता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि भाजपा के घोषणापत्र को जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पीने के पानी की कमी को दूर करने के लिए अलग जल शक्ति मंत्रालय बनाया जाएगा। जिसमें नल से जल को घर घर पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पानी के लिए सरकार मिशन मोड में काम करेगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण भारत में गेहूं की उत्पादकता में 5 से 20 फीसदी तक की कमी हो सकती है। इसके अलावा बारिश में कमी और भूगर्भ जल का स्तर नीचे जाने से धान, और गन्ना जैसी फसलों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।
गर्मी बढ़ाएगी किडनी के मरीजों की संख्या
बढ़ते तापमान के कारण किडनी के मरीजों की संख्या 10 फीसदी तक बढ़ी है। देश में किडनी फेल होने के मामलों में पिछले 15 सालों में दोगुना और डायलिसिस करवाने वाले मरीजों की संख्या में 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में लगभग 75000 मरीज इस समय डायलीसिस पर हैं और उनकी संख्या सालाना 10 से 20 फीसदी की दर से बढ़ रही है।