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Drugs Trap in India: पोपट पान से लेकर म्याऊं म्याऊं तक के नाम से बिकता है नशा, बीते कुछ सालों में 25 हजार करोड़ के ड्रग्स की हुई बरामदगी

सार

मुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस में आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के लापरवाही भरे रवैए के चलते तकरीबन 1,75,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स भारत के बाजारों में युवाओं को बर्बाद करने के लिए फैल चुके हैं। 
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बरामद ड्रग्स (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'पोपट पान' से लेकर 'म्याऊं म्याऊं' और 'अलबेली पहेली' से लेकर 'चमेली' तक के नाम से देश में नशे का बड़ा कारोबार होता है। जानकारों के मुताबिक, देश में साल भर के भीतर हजारों-हजार करोड़ का ड्रग सप्लाई होता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बीते कुछ सालों में देश के अलग-अलग बंदरगाह और शहरों में तकरीबन 25,000 करोड़ से ज्यादा के ड्रग्स की तो बरामदगी हुई है, जबकि प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस में आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के लापरवाही भरे रवैए के चलते तकरीबन 1,75,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स भारत के बाजारों में युवाओं को बर्बाद करने के लिए फैल गए। 
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कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि पूरे देश में सबसे ज्यादा नशे का कारोबार गुजरात के बंदरगाहों से हो रहा है। बावजूद इसके सरकार हमारे युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा रही है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो से जुड़े रहे एक अवकाश प्राप्त अधिकारी कहते हैं कि नशे का कारोबार कोविड के दौरान तो थोड़ा कम हुआ लेकिन उसके बाद एक बार फिर से यह तेजी पकड़ने लगा है। वो कहते हैं कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो साल भर में अलग-अलग छापेमारी करता है और उसमें सैकड़ों करोड़ के ड्रग्स की बरामदगी होती है। उनका कहना है कि नशे के कारोबार की जड़ें इतनी गहरी है कि उनको फिलहाल कम किया जा सकता है लेकिन पूरी तरीके से इस पर अंकुश लग जाएगा ऐसा मुश्किल है। उनका कहना है नशे का कारोबार एक सिंडिकेट के तहत काम करता है। वो कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि हमारे नेटवर्क को इसका अंदाजा नहीं है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को जब जब जैसे-जैसे सूचनाएं मिलती हैं तो वह न सिर्फ उस पूरे रैकेट को पकड़ता है बल्कि उसकी टाइम में जाकर क्यों उसकी जांच पड़ताल भी करता है। एनसीबी से जुड़े रहे उक्त वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि नशे के कारोबार फिडिलिंग करने के लिए मुंबई एक बड़ा ठिकाना बनता जा रहा है।
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नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो से जुड़े सूत्रों के मुताबिक देश के अलग-अलग बाजारों में अलग-अलग हिस्सों में वृक्ष को अलग अलग नाम से पहचाना जाता है और उसको मांगा जाता है। इसमें पोपट पान से लेकर म्याऊं म्याऊं और अलबेली पहली से लेकर चमेली जैसे तमाम तरह के नामों से देश के अलग-अलग बड़े-बड़े महानगरों में उसको पहुंचाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक मुंबई में ही सिर्फ हर महीने तकरीबन 500 करोड़ का नशे का अवैध कारोबार चलता है। नारकोटिक्स ब्यूरो से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कस्टम डिपार्टमेंट ने बीते कुछ समय में 1000 करोड़ रुपए की खेप अफगानिस्तान से मुलेठी के नाम पर लाई गई तथाकथित आयुर्वेदिक जड़ी बूटी को जप्त किया गया। सूत्रों का कहना है कि अफगानिस्तान से आने वाली है क्वालिटी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी बूटी से तमाम तरह के ड्रग्स को तैयार किया जाता है। नशे के कारोबार पर पैनी नजर रखने वाले महकमों के सूत्रों के मुताबिक मुंबई के धारावी अंधेरी पालघर वसई और नवी मुंबई ड्रग्स तस्करी के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। मुंबई का बटाटा गैंग भी इसी उप नगरों और इलाकों से अपने नशे का कारोबार भी करता है।

देश में नशे के कारोबार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा कहते हैं कि इसमें हमें राजनीति से बच कर अपने देश के युवाओं को बचाने के लिए आगे आना होगा। हालांकि पवन खेड़ा का कहना है की सरकार की लापरवाही के चलते ही देश में नशे का कारोबार पनप रहा है। खेड़ा कहते हैं 2017 में गुजरात के बंदरगाह पर जब नशे की खेप की बरामदगी हुई उसी वक्त सरकार को सचेत हो जाना चाहिए था। लेकिन सरकार लापरवाही करती रही नतीजतन 2020 में 175 करोड़ के ड्रग्स गुजरात में पकड़े गए। इसके अलावा 2021 में 150 करोड़ के ड्रग्स फिर गुजरात में पकड़े गए। जबकि कुछ दिन पहले ही पीपावाव पोर्ट पर साढ़े चार सौ करोड़ के ड्रग्स की बरामदगी हुई है। 

इसके अलावा कांग्रेस ने कहा कि 18 सितंबर 2021 को ईरान के रास्ते से 150 करोड़ रुपए के ट्रक फिर गुजरात में ही मुंद्रा पोर्ट पर जप्त किए गए। कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि जब गुजरात की कोस्टलाइन पर नशे की सबसे ज्यादा आमद हो रही है तो यहां की सरकार और केंद्र की सरकार आखिर कर क्या रही है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा कहते हैं कि गुजरात गेटवे ऑफ़ ड्रग्स बनता जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि नशे के कारोबार सिंडिकेट को तोड़ने के लिए सरकार को जो प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे वह नहीं उठाए गए। 
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