भारत बायोटेक के अलावा देश की कुछ अन्य बड़ी मेडिकल कम्पनियां भी वैक्सीन बनाने की इस वैश्विक दौड़ में शामिल हैं। इन कंपनियों में मेडिकल क्षेत्र की बड़ी कंपनी जायड्स कैडिला (Zydus Cadila), सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (Serum Institute of India) और पैंसिया बायोटेक (Panacea Biotec) शामिल हैं।
इनकी वैक्सीन का काम भी काफी तेज गति से आगे चल रहा है। हालांकि, इनमें किसी को अभी तक मानव परीक्षण की अनुमति नहीं मिली है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक विभिन्न देशों में इस समय 140 वैक्सीन बनाने का काम चल रहा है। इसमें 16 वैक्सींस पर काम इनके अंतिम स्टेज में चल रहा है। इन 16 वैक्सींस में चीन में पांच, अमेरिका में तीन, दो इंग्लैंड में और आस्ट्रेलिया, जर्मनी और रूस में एक-एक वैक्सीन पर काम तेजी से चल रहा है।
इसमें ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन एस्ट्रा जेनेका (Astra Zeneka) अभी तक सबसे बेहतर स्थिति में बताई गई है। इसे सबसे कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र के लोगों में भी बेहतर काम करता हुआ बताया गया है।
यह प्रयोग के तीसरे चरण में है और इस समय आठ हजार लोगों पर इसका परीक्षण चल रहा है।
अमेरिका की बायोटेक फर्म इनोवियो फार्मास्यूटिकल्स की वैक्सीन आईएनओ-4800 भी प्रयोगों के दौरान बेहतर परिणाम देती हुई बताई गई है।
इसे कोरोना वायरस के डीएनए को लक्ष्य करके तैयार किया गया है, जिससे यह संक्रमित लोगों को इस बायर्स से लड़ने में सक्षम बनाती है।
कंपनी ने दावा किया है कि पहले चरण के परिणाम में इसने सकारात्मक असर दिखाया है। अब कंपनी दूसरे और तीसरे चरण के प्रयोग एक साथ करने की रणनीति बनाकर जल्दी से जल्दी वैक्सीन तैयार करने का दावा कर रही है।
जर्मनी की कंपनी जर्मन बायोटेक ने दावा किया है कि उसकी दवा (BNT162b1) का दो दर्जन मरीजों पर परीक्षण सफल रहा है।
दवा के इस्तेमाल के 28 दिन के बाद इन लोगों में कोरोना की प्रतिरोधक क्षमता वाले एंटीबॉडीज बनते हुए पाए गए हैं।
बायोएनटेक और फाइजर (BioNTech-Pfizer) इस वर्ष के अंत तक इस दवा की भारी मात्रा में उत्पादन करने का लक्ष्य लेकर आगे चल रहे हैं।
चीन पर आरोप है कि कोरोना वायरस उसकी गलती से पूरी दुनिया में फैला है। लेकिन चीन इस वायरस की वैक्सीन बनाने के मामले में भी सबसे आगे चल रहा है।