महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे के कारण फसलों को हुए नुकसान के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है। सरकार फसल नुकसान के पंचनामे, ऋण माफी, चारा-पेयजल की व्यवस्था और सिंचाई के लिए अतिरिक्त बिजली जैसे कदम उठा रही है। वहीं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी विदर्भ और मराठवाड़ा समेत प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को सहायता का आश्वासन दिया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण राज्य के कई जिलों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं और इससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे कृषि उत्पादन में गिरावट की आशंका भी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में फसलों की स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार अगले सप्ताह प्रारंभिक समीक्षा करेगी। इसके बाद फसल नुकसान का औपचारिक आकलन करने के लिए पंचनामे किए जाएंगे, ताकि प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
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कर्जमाफी योजना पर भी काम जारी
फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार की फसल ऋण माफी योजना पर काम जारी है। अब तक लाभार्थियों की तीन सूचियां जारी की जा चुकी हैं। शेष सूचियों का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि पात्र किसानों को योजना का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही चारा उत्पादन की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में चारे की तत्काल आपूर्ति के लिए व्यवस्था की गई है। पेयजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
कुओं से सिंचाई करने वाले किसानों को अतिरिक्त बिजली
खड़ी फसलों को बचाने के लिए कुओं से सिंचाई करने वाले किसानों को शाम के समय अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंगल-फेज बिजली वाले क्षेत्रों में भी बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसान अपनी फसलों को सूखने से बचा सकें। विपक्षी दलों की ओर से की जा रही आलोचनाओं पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सूखा राहत से संबंधित कामकाज सरकार के शासनादेशों (जीआर) और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत किया जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए इन निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र के तय ढांचे के अनुसार प्रक्रिया पूरी करने के साथ-साथ राज्य सरकार अपने स्तर पर भी प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचा रही है।
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शरद पवार के पत्र पर भी दिया जवाब
इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने शुक्रवार को कहा था कि महाराष्ट्र सरकार सूखे जैसे हालात से निपटने और किसानों को राहत देने के लिए पहले ही कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुकी है। वह एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के उस पत्र पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें पवार ने महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात को देखते हुए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की थी।
5 अक्टूबर से शुरू होंगे फसल नुकसान के पंचनामे
फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार की कृषि ऋण माफी योजना सक्रिय रूप से चल रही है। लाभार्थियों की तीन सूचियां जारी की जा चुकी हैं, जबकि अन्य सूचियां तैयार की जा रही हैं, ताकि सभी पात्र किसानों को सहायता मिल सके। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के प्रोटोकॉल के तहत फसल नुकसान का आकलन करने के लिए पंचनामे 5 अक्टूबर से शुरू किए जाएंगे। इन आकलनों को केंद्र से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सूखे जैसे हालात को बेहद गंभीरता से ले रही है। प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारे और लोगों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रावधान किए जा रहे हैं। शरद पवार के पत्र का स्वागत करते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य प्रशासन रचनात्मक सुझावों को शामिल करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के बजाय किसानों के हित में जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
डिप्टी CM शिंदे ने भी किसानों को दिया भरोसा
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी महाराष्ट्र में बारिश की स्थिति की समीक्षा की और सूखे के कारण फसलों को भारी नुकसान झेल रहे किसानों को भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को मुश्किल हालात में अकेला नहीं छोड़ेगी और सूखे जैसे हालात वाले क्षेत्रों में उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शरद पवार की ओर से महाराष्ट्र में सूखा घोषित करने और किसानों को तत्काल राहत राशि देने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने माना कि विदर्भ और मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी के कारण खड़ी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन करने के लिए पंचनामे किए जा रहे हैं। इसी आकलन के आधार पर किसानों को हुए वास्तविक नुकसान के अनुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी।