देश में ड्रोन आयात से जुड़े एक बड़े भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने एक प्रमुख कॉरपोरेट समूह के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट भरत माथुर और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह मामला ड्रोन आयात की अनुमति दिलाने के बदले पैसे लेने से जुड़ा है, जिससे सरकारी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह रिश्वत करीब 2.5 लाख रुपये की थी, जो एक निजी एयरोस्पेस कंपनी के लिए जरूरी मंजूरी दिलाने के बदले मांगी गई थी। आरोप है कि डीजीसीए के अधिकारी ने फाइलों को आगे बढ़ाने और अनुमति देने के लिए यह रकम मांगी थी। सीबीआई ने शनिवार को जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई गिरफ्तारी?
सीबीआई के मुताबिक, डीजीसीए के एयरवर्थनेस निदेशालय में तैनात अधिकारी ने निजी कंपनी से रिश्वत की मांग की थी। इसके बाद एजेंसी ने योजना बनाकर आरोपी को पकड़ने की कार्रवाई की। जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, टीम ने मौके पर ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया और पूरी रकम बरामद कर ली।
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छापेमारी में क्या-क्या मिला?
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने दिल्ली में चार अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। इस दौरान करीब 37 लाख रुपये नकद, सोने-चांदी के सिक्के और कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। इससे संकेत मिलता है कि मामला सिर्फ एक लेन-देन तक सीमित नहीं हो सकता और जांच आगे बढ़ सकती है।
डीजीसीए पर क्या सवाल उठे?
इस मामले के सामने आने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि ड्रोन आयात जैसे संवेदनशील मामलों में अनुमति देने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की गुंजाइश बनी हुई थी। यह मामला सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है।
सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं। एजेंसी यह भी देख रही है कि क्या इस तरह के और मामले सामने आ सकते हैं। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है।
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