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ड्रोन हमला बड़ी चेतावनी: सीमापार आतंकवाद हाईटेक हुआ, रक्षा विशेषज्ञों ने जताई चिंता, कही ये बातें

Mon, 28 Jun 2021 09:22 PM IST
सुरेंद्र जोशी शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सवाल यह है कि आतंकियों ने ड्रोन हमला कर बड़ा संदेश दिया है। उनके पास कहां से आई यह तकनीक और इम्पैक्ट इम्प्रूव्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस? सरकार को सीमा पर करने पड़ेंगे सुरक्षा के और पुख्ता उपाय
 
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First Drone Attack on Indian Military Base - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों, एनएसजी के पूर्व अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों में जम्मू में वायु सेना के अड्डे पर हुए विस्फोट को लेकर काफी बेचैनी है। उनके मुताबिक आतंकियों ने ड्रोन से हमला कर बड़ा संदेश दिया है। यह बेचैनी साउथ ब्लाक में भी है और सभी को फोरेंसिक जांच रिपोर्ट विस्तृत ब्यौरे का इंतजार है। 

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ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) सपन चटर्जी के अनुसार आतंकियों का सबसे बड़ा संदेश तो यही है कि भारत के सैन्य ठिकाने सुरक्षित नहीं हैं। आतंकी जब चाहेंगे, निशाना बना लेंगे। दूसरा बड़ा संदेश यह है कि भारत में सीमा पार का प्रायोजित आतंकवाद हाईटेक हो चुका है।

पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर हुई आतंकी घटना को काफी गंभीरता से लेते हैं। एयर वाइस मार्शल का कहना है कि पाकिस्तान के पास इस क्षमता के छोटे ड्रोन होने की सूचना ही बड़ी बात है। सिंह कहते हैं कि उन्हें यह हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रायोजित ही लग रहा है। ड्रोन द्वारा बम लेकर एयरफोर्स स्टेशन तक आना एक बात है। इस बम का छोड़ा जाना और गिरते ही फट जाना दूसरी और गंभीर बात है। इसका अर्थ यह कि आतंकियों के पास न केवल तकनीकी रूप से सक्षम ड्रोन हैं, बल्कि उन्नत किस्म के (इम्पैक्ट इम्प्रूव्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) विस्फोटक भी हैं।
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क्या रहा होगा आतंकियों का उद्देश्य?
ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) सपन चटर्जी का कहना है कि अफगानिस्तान की सीमा को लेकर पाकिस्तान के ऊपर बहुत दबाव बढ़ा है। भारत ने अफगानिस्तान में अपने हितों की रक्षा के लिए थोड़ी तेजी दिखाई है। इसने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को तंग किया होगा। दूसरा बड़ा कारण जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक, शांति और स्थायित्व के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बढ़ाने का प्रयास भी हो सकता है। क्योंकि इससे न केवल पाकिस्तान, बल्कि चीन की भी चिंता बढ़ेगी। 

सपन चटर्जी के इस विश्लेषण से वाइस एयर मार्शल सिंह और रक्षा मामलों के जानकार रंजीत कुमार भी सहमत हैं। एनबी सिंह का कहना है कि एक दृष्टि से देखा जाए तो ड्रोन हमला करके आतंकियों का मकसद कोई बड़ा नुकसान या दहशत फैलाना नहीं था। उन्होंने जो स्थान चुना है, उसका मकसद केवल हमारी सुरक्षा व्यवस्था को ये बताना और यह संदेश देना भर था कि वह कहीं भी और कभी भी घुस सकते हैं।

आतंकियों के पास ड्रोन और इम्पैक्ट आईडी विस्फोटक?

वाइस एयर मार्शल और ब्रिगेडियर चटर्जी दोनों का कहना है कि ड्रोन की तकनीक में चीन का जवाब नहीं है। उसके पास उन्नत किस्म की फ्लाइंग बर्ड्स हैं। लेकिन पाकिस्तान के पास इस तरह की तकनीक होने में संदेह है। इसी तरह से ड्रोन ने जो विस्फोटक गिराया है, वह जमीन पर आते ही फटा (विस्फोट हुआ) है। इसका अर्थ यह हुआ कि आतंकियों ने इम्पैक्ट आईडी का इस्तेमाल किया है। दोनों तकनीकों का आतंकियों के पास आना कोई सामान्य बात नहीं है। हालांकि सपन चटर्जी कहते हैं कि इस तरह का ड्रोन हमला दो साल पहले सऊदी अरब के तेल भंडार पर हुआ था। लेकिन फिर भी घटना गंभीर है। समझा जा रहा है कि अभी विस्फोट की जांच चल रही है। 

फोरेंसिक जांच के बाद ही मिलेगा सवालों का जवाब
फोरेंसिक जांच के बाद ही इसकी प्रकृति के बारे में पता चल पाएगा। इसी तरह से सेना, एनआईए और केन्द्रीय जांच एजेंसियां विस्फोट कराने वाले सूत्रधारों की खोज में लगी हैं। ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि यह ड्रोन विस्फोटक लेकर कहां से आया? यह घुसपैठ करके आए आतंकियों की करतूत है या फिर सीमापार से आया है? बताते हैं इसके प्रमाण मिलने के बाद केन्द्र सरकार इस बारे में किसी निर्णायक स्थिति में होगी।

 
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क्या भारत के पास ऐसे ड्रोन मार गिराने के उपाय नहीं?

सैन्य विशेषज्ञों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एनएसजी वायुसेना स्टेशन के भीतर तैनात है। एनएसजी के पास ड्रोन को मार गिराने की क्षमता है। इसके अलावा स्पेशल दस्ते इसमें सक्षम हैं। लेकिन इंफैट्री के जवान केवल इनपर निशाना साधकर गोली बारी ही कर सकते हैं। 

बताते हैं कि ये ड्रोन बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने वाले, आकार में बहुत छोटे, अधिकतम नॉन मेटैलिक और ऑपरेशन के दौरान बहुत कम ध्वनि निकालते हैं। इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आते। पक्षियों जैसी मिलती जुलती आकृति के कारण सैटेलाइट आदि की पकड़ में भी आना मुश्किल होता है। इसलिए इस तरह के ड्रोन ऑपरेशन को नाकाम करने के लिए हमेशा सतर्कता ही सबसे उपयुक्त उपाय है।

क्या सरकार बढ़ाएगी देश का रक्षा खर्च?
मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले ने देश के सभी तटों पर निगरानी के उपकरण, पेट्रोलिंग आदि के नए पैरामीटर बनाने पर मजबूर कर दिया था। सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ मौजूदा घटना को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं। ब्रिगेडियर(रि.) चटर्जी का कहना है कि इसका तोड़ निकालने वाली तकनीक और युद्ध पद्धति तैयार करनी होगी। यह सीधा मॉडर्न वारफेयर की तरफ संकेत है। 

खतरे का संकेत, चेतावनी को नजरअंदाज नहीं कर सकते
रंजीत कुमार भी कहते हैं 24 घंटे लगातार सुरक्षा बलों को चौकस नहीं रखा जा सकता। लेकिन यह खतरे का संकेत है। इसलिए हमारे सुरक्षा विशेषज्ञों को इस बारे में सोचना होगा। वैसे भी पंजाब के  सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान की तरफ से पिछले साल भी काफी ड्रोन आए थे। तब भी यही संदेश था। एयर वाइस मार्शल सिंह कहते हैं कि दुश्मन चाहे आतंकी हो या फिर कोई देश, लेकिन सुरक्षा के बाबत मिलने वाली चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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