वाइस एयर मार्शल और ब्रिगेडियर चटर्जी दोनों का कहना है कि ड्रोन की तकनीक में चीन का जवाब नहीं है। उसके पास उन्नत किस्म की फ्लाइंग बर्ड्स हैं। लेकिन पाकिस्तान के पास इस तरह की तकनीक होने में संदेह है। इसी तरह से ड्रोन ने जो विस्फोटक गिराया है, वह जमीन पर आते ही फटा (विस्फोट हुआ) है। इसका अर्थ यह हुआ कि आतंकियों ने इम्पैक्ट आईडी का इस्तेमाल किया है। दोनों तकनीकों का आतंकियों के पास आना कोई सामान्य बात नहीं है। हालांकि सपन चटर्जी कहते हैं कि इस तरह का ड्रोन हमला दो साल पहले सऊदी अरब के तेल भंडार पर हुआ था। लेकिन फिर भी घटना गंभीर है। समझा जा रहा है कि अभी विस्फोट की जांच चल रही है।
फोरेंसिक जांच के बाद ही मिलेगा सवालों का जवाब
फोरेंसिक जांच के बाद ही इसकी प्रकृति के बारे में पता चल पाएगा। इसी तरह से सेना, एनआईए और केन्द्रीय जांच एजेंसियां विस्फोट कराने वाले सूत्रधारों की खोज में लगी हैं। ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि यह ड्रोन विस्फोटक लेकर कहां से आया? यह घुसपैठ करके आए आतंकियों की करतूत है या फिर सीमापार से आया है? बताते हैं इसके प्रमाण मिलने के बाद केन्द्र सरकार इस बारे में किसी निर्णायक स्थिति में होगी।
सैन्य विशेषज्ञों और सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एनएसजी वायुसेना स्टेशन के भीतर तैनात है। एनएसजी के पास ड्रोन को मार गिराने की क्षमता है। इसके अलावा स्पेशल दस्ते इसमें सक्षम हैं। लेकिन इंफैट्री के जवान केवल इनपर निशाना साधकर गोली बारी ही कर सकते हैं।
बताते हैं कि ये ड्रोन बहुत कम ऊंचाई पर उड़ने वाले, आकार में बहुत छोटे, अधिकतम नॉन मेटैलिक और ऑपरेशन के दौरान बहुत कम ध्वनि निकालते हैं। इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आते। पक्षियों जैसी मिलती जुलती आकृति के कारण सैटेलाइट आदि की पकड़ में भी आना मुश्किल होता है। इसलिए इस तरह के ड्रोन ऑपरेशन को नाकाम करने के लिए हमेशा सतर्कता ही सबसे उपयुक्त उपाय है।
क्या सरकार बढ़ाएगी देश का रक्षा खर्च?
मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले ने देश के सभी तटों पर निगरानी के उपकरण, पेट्रोलिंग आदि के नए पैरामीटर बनाने पर मजबूर कर दिया था। सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ मौजूदा घटना को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देख रहे हैं। ब्रिगेडियर(रि.) चटर्जी का कहना है कि इसका तोड़ निकालने वाली तकनीक और युद्ध पद्धति तैयार करनी होगी। यह सीधा मॉडर्न वारफेयर की तरफ संकेत है।
खतरे का संकेत, चेतावनी को नजरअंदाज नहीं कर सकते
रंजीत कुमार भी कहते हैं 24 घंटे लगातार सुरक्षा बलों को चौकस नहीं रखा जा सकता। लेकिन यह खतरे का संकेत है। इसलिए हमारे सुरक्षा विशेषज्ञों को इस बारे में सोचना होगा। वैसे भी पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान की तरफ से पिछले साल भी काफी ड्रोन आए थे। तब भी यही संदेश था। एयर वाइस मार्शल सिंह कहते हैं कि दुश्मन चाहे आतंकी हो या फिर कोई देश, लेकिन सुरक्षा के बाबत मिलने वाली चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।