रेड्डी ने बताया कि मिशन शक्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में मंजूरी दी थी। रिकॉर्ड 2 साल में करीब 150 वैज्ञानिकों की मेहनत से इस प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सिस्टम और अन्य उपकरणों के लिए कई भारतीय कंपनियों ने सहयोग किया। जनवरी 2019 में रडार, कम्यूनिकेशन नेटवर्क आदि स्थापित किए गए। आखिरकार 27 मार्च को सुबह मिसाइल लांच की गई और उसने पूरी सटीकता के साथ टारगेट को हिट किया।
डिफेंस का सबसे अच्छा तरीका डिटरेंस है
डीआरडीओ चेयरमैन ने कहा कि डिफेंस का सबसे अच्छा तरीका डिटरेंस है। मिशन शक्ति से देश ने जमीन से ही सीधे लक्ष्य को निशाना बनाने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और यह डिफेंस के लिए भी काम करता है।