Tamil Nadu: तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने कहा कि द्रविड़ विचारधारा ने पिछले 60-70 वर्षों में आर्य और द्रविड़ों के बीच भेदभाव की कहानी गढ़ी है, जबकि भारतीय साहित्य में आर्य शब्द का कभी नस्ल के रूप में उपयोग नहीं किया गया।
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन.रवि ने सोमवार को दावा किया कि द्रविड़ विचारधारा ने आर्यों और द्रविड़ों के बीच भेदभाव की एक सोच बनाई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय साहित्य में आर्य शब्द का उपयोग एक नस्ल के रूप में नहीं किया गया है।
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राज्यपाल ने कहा, भारतीय साहित्य, चाहे वह संगम साहित्य हो या वैदिक साहित्य, किसी में भी आर्य शब्द का उपयोग नस्ल के रूप में नहीं किया गया है। वास्तव में तमिल साहित्य में भी आर्य शब्द का उपयोग नस्ल के रूप में नहीं किया गया। उन्होंने यह बयान डीजी वैष्णव कॉलेज में 'सिंधु घाटी सभ्यता: इसकी संस्कृति और लोग' विषय पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के शुभारंभ के दौरान दिया। रवि ने आगे बताया कि पिछले 60 से 70 वर्षों में द्रविड़ विचारधारा ने आर्य और द्रविड़ के बीच मतभेदों की कहानी गढ़ी है।
रवि ने बताया कि वेदों के जरिए इस सभ्यता ने भारत की संस्कृति और पहचान को बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस सभ्यता के एकता और भाईचारे जैसे मूल्य आज भी हमें प्रेरित करते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस सभ्यता को लंबे समय से हो रही उस बौद्धिक और राजनीतिक हिंसा से बचाएं, जो यूरोप के उपनिवेशषवादियों और मार्क्सवादियों व द्रविड़ विचारधारा से जुड़े लोगों ने की, जिन्होंने आर्य आक्रमण और आर्य नस्ल के झूठे सिद्धातों को फैलाया।
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राज्यपाल ने यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान ने इस ऐतिहासिक सच को साबित किया है कि सरस्वती-सिंधु सभ्यता वही वैदिक सभ्यता थी, जिसे पूरे भारत ने अपनाया। इस आधुनिक विज्ञान में उपग्रह चित्रण और परमाणु भौतिकी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब हमारा राष्ट्रीय पुनरुत्थान हो रहा है, लोगों को सरस्वती-सिंधु सभ्यता के सही ऐतिहासिक दृष्टिकोण को फैलाने में सक्रिय होना चाहिए।