मुस्लिम धर्मगुरुओं के साथ श्री श्री रविशंकर
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पूर्व सांसद, रामकथा वाचक और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े डॉ. राम विलास वेदांती एक बार फिर श्री श्री रविशंकर पर मुखर हो गए हैं। डॉ. वेदांती ने कहा कि श्री श्री रविशंकर न तो शिव में हैं, न विष्णु में। आखिर वह होते कौन हैं अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की ठेकेदारी लेने वाले।
वेदांती के अनुसार रविशंकर का राम मंदिर आंदोलन से क्या लेना देना? वेदांती ने कहा कि वह तो दालभात में मूसलचंद हैं और यदि इस बार अयोध्या आए तो बेइज्जत करके वापस भेजे जाएंगे।
वेदांती ने कहा कि मुझे आज तक रविशंकर का आर्ट ऑफ लिविंग समझ में नहीं आया। उनके आर्ट ऑफ लिविंग का हिन्दू धर्म से लेना-देना ही क्या है? वह तो योगा और धर्म के नाम पर फैशन और एनजीओ चला रहे हैं। निर्मोही अखाड़ा समेत अन्य को रुपये से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
डॉ. वेदांती ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी अयोध्या में श्री श्री की दखलंदाजी नहीं चाहते। कर्नाटक के उडुपी में संघ प्रमुख ने साफ तौर पर श्री श्री के प्रयास को गलत बताया था।
रविशंकर नहीं चाहते अयोध्या में मंदिर
डॉ. वेदांती के अनुसार दरअसल श्री श्री रविशंकर अयोध्या में राम मंदिर चाहते ही नहीं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद और राम मंदिर के पक्षकार तथा आंदोलन से जुड़े लोग अयोध्या में केवल राम मंदिर चाहते हैं। जहां राम लला विराजमान हैं, उसके आसपास किसी भी मस्जिद का निर्माण हमें मंजूर नहीं है।
दूसरे हम आक्रांता बाबर के नाम पर कोई मस्जिद नहीं चाहते। चाहे वह अयोध्या के बाहर ही क्यों न बने। वेदांती ने कहा कि शिया वक्फ बोर्ड भी वहां मस्जिद नहीं चाहता। उसने बाकायदा अदालत में शपथ-पत्र दाखिल करके लखनऊ में मस्जिद निर्माण की अनुमति मांगी है।
लेकिन श्री श्री रविशंकर अयोध्या में मंदिर के साथ-साथ भव्य मस्जिद की मुहिम चला रहे हैं।