राहुल गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे तो ठीक था और अब पार्टी के जनरल बन गए हैं। जनरल देश से बाहर रहकर ट्विटर पर सक्रिय हैं और पार्टी के कमांडो मोर्चा संभाले हैं। जब भाजपा के एक केन्द्रीय मंत्री यह तंज कस रहे थे तो पास में खड़े कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के पास बेबसी की मुस्कान के अलावा कोई चारा नहीं था। लेकिन कहते हैं कि सच तो सच होता है। कड़वा भी होता है।
हालांकि कांग्रेस पार्टी ने अपने अध्यक्ष राहुल गांधी के देश में न होने की कमी नहीं महसूस होने दी। राज्यसभा में पार्टी ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ नीरव मोदी, मेहुल चोकसी समेत अन्य द्वारा की गई धोखाधड़ी के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।
सभापति के आसन के करीब वेल में आकर पार्टी सांसदों ने नारा लगाया और नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने सदन से बाहर आकर बयान भी दिया।
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विदेशों से कालाधन वापस लाने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने इसका उल्टा कर दिया। प्रधानमंत्री ने देश में जो सफेद धन था उसे भी बाहर भेज दिया। कांग्रेस पार्टी के हंगामे के बाद आज राज्यसभा में सदन की कार्यवाही नहीं चल पाई।
लोकसभा में भी कांग्रेस के नेताओं मे नीरव मोदी और मेहुल चोकसी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी के मुद्दे को उठाया। लेकिन सदन के बाहर नेताओं के बीच में होने वाले हंसी और ठहाके में कांग्रेस के नेताओं के पास अपने अध्यक्ष के देश में न होने को लेकर कोई जवाब नहीं था।
कांग्रेस अध्यक्ष का ट्विटर वॉर
राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष का ट्विटर वॉर
यह भी दिलचस्प है। कांग्रेस पार्टी के नेता कहते हैं कि राहुल गांधी जहां भी हैं, उनके पास हर एक घटनाक्रम की पल-पल की जानकारी है। पार्टी लगातार अपने अध्यक्ष के संपर्क में है। वहीं राहुल गांधी ने ट्वीट करके हमला बोला है। राहुल ने अपने ट्वीट में भाजपा पर छल करके मेघालय में सत्ता हथियाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने ट्वीट संदेश में कहा कि महज दो सीट पाने वाली भाजपा ने छल का सहारा लेकर वहां सत्ता हड़प ली है। जैसा कि उसने मणिपुर और गोवा में किया था। इसी के साथ उन्होंने फिर से पूर्वोत्तर के लोगों का भरोसा जीतने का विश्वास दिलाया है। पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं को उनके प्रयासों के लिए बधाई दी है।
तैयारियों में व्यस्त
वैसे कांग्रेस पार्टी मार्च के तीसरे सप्ताह में दिल्ली में आयोजित प्लेनरी सेशन के आयोजन में व्यस्त है। इसकी तैयारी के लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा नेताओं को भी तरजीह दी है। हरीश रावत समेत अन्य को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई है। कांग्रेस सूत्रों की माने तो इस प्लेनरी सेशन के बाद कांग्रेस पार्टी के तेवर में काफी बदलाव आएगा।
कर्नाटक, म.प्र., छत्तीसगढ़, राजस्थान के विधानसभा चुनाव में इसका असर भी देखने को मिलेगा। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि अभी लोकसभा चुनाव की तारीख आने में एक साल का समय है। उससे पहले सबकुछ ठीक हो जाएगा।