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कोरोना : हर स्तर पर लापरवाही से रूप बदलता रहा वायरस, दूसरी लहर हुई घातक 

Thu, 20 May 2021 08:13 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • कोरोना वायरस पहले 5 से 7 दिन शरीर में अपनी संख्या बढ़ाता है चरणवार शरीर पर करता है हमला, जिसे समझना जरूरी 
  • हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नरेश त्रेहान ने कहा, साइटोकाइन स्टॉर्म पहुंचाता है नुकसान 
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कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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देश में कोरोना की दूसरी लहर के अधिक आक्रामक होने का प्रमुख कारण संयुक्त रूप से बरती गई लापरवाही है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से बुधवार को आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में देश के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नरेश त्रेहान ने कहा कि दूसरी लहर के भयावह होने की प्रमुख वजह हर स्तर पर बरती गई लापरवाही है। 

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भारत में मिला स्ट्रेन पहले वाले की तुलना में 4 गुना अधिक संक्रामक है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। वह बताते हैं कि देश में वायरस को म्यूटेट का भी पूरा मौका मिला। इसी कारण हालात समय के साथ खराब होते चले गए और दूसरी लहर घातक हो गई।

साइटोकाइन स्टॉर्म पहुंचाता है नुकसान 
पहले चरण में वायरस 24 से 48 घंटे में फेफड़ों के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में पहुंचकर 5 से 7 दिन अपनी संख्या बढ़ाता है। दूसरे चरण में वायरल लोड बढ़ते ही शरीर प्रतिक्रिया करना शुरू करता है। इसी दौरान साइटोकाइन स्टॉर्म होता है जिसमें शरीर की इम्युनिटी शरीर को ही नुकसान पहुंचाने लगती है। तीसरे चरण में फेफड़ों व दूसरे अंगों को नुकसान होने से रोगी की स्थिति गंभीर हो सकती है।
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वायरस का फैलाव रोकना जरूरी 
डॉक्टर त्रेहन बताते हैं कि शरीर में वायरस के फैलाव को रोकना बहुत जरूरी है। इटली में शोध के तहत 50 कोरोना संक्रमितों का पोस्टमार्टम करने पर पता चला है कि वायरस ने छोटी से छोटी धमनी में खून का थक्का जमा दिया है। रक्त वाहिकाओं में सूजन भी देखी गई। वायरस के फैलाव को समय रहते रोका जाए और एंटी कॉगुलेंट दवाई दी जाए जिससे खून का थक्का न जमे तो संक्रमित की मौत के खतरे को कम किया जा सकता है।



देश में संकट के 10 प्रमुख कारण

  1. सभी ने संयुक्त रूप से लापरवाही बरती, त्यौहार, चुनाव, यात्रा जैसी गतिविधियां।
  2. मरीज बढ़े तो जांच और अस्पताल में बेड की किल्लत होने से इलाज मिलने में मुश्किल।
  3. समय पर इलाज न मिलने से ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों की संख्या बढ़ी।
  4. देश में 22 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत संकट में बढ़कर 10 हजार मीट्रिक पहुंची।
  5. देश में ऑक्सीजन सिलेंडर का संकट भी गहराया मांग के अनुसार निर्माण नहीं। 
  6. समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने से गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी। 
  7. हाई फ्लो ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत।
  8. कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ने से देशभर में आईसीयू वेंटीलेटर का संकट। 
  9. गंभीर मरीजों के लिए जीवन रक्षक दवाएं समय पर न मिलने से स्थिति बिगड़ी।
  10. जीवन रक्षक दवाएं न मिलने से मौत और अब ब्लैक फंगस एक नई चुनौती।
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