राष्ट्रीय रसद नीति पर उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में पिछले एक साल में हमारे द्वारा किए गए काम के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, लोगों का भी मानना है कि जिस उद्देश्य के साथ इसे शुरू किया गया था, उससे कहीं बेहतर नतीजे मिल रहे हैं। विभागों की प्रतिक्रिया के अनुसार, बुनियादी ढांचे में लाभ हुआ है। इससे समय की बचत होती है।
उन्होंने कहा, राष्ट्रीय रसद नीति की योजना की गुणवत्ता में बहुत सुधार हुआ है, जिससे इसके कार्यान्वयन में समय की बचत हुई है। अनुराग जैन ने कहा, योजना की उच्चतम स्तर पर समीक्षा के दौरान सामाजिक क्षेत्र में इसके उपयोग पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, इसके बाद हमने पांच विभागों के साथ सामाजिक क्षेत्र के साथ चर्चा शुरू की। इसके बाद हमारा काम शुरू हो गया है। हालांकि, इसमें थोड़ा समय लगेगा, लेकिन विभागों द्वारा संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
क्या है राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति?
इस नीति में प्रक्रियागत इंजीनियरिंग, डिजिटलीकरण और बहु-साधन परिवहन जैसे क्षेत्रों पर फोकस करने की योजना है। भारत में अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में लॉजिस्टिक की लागत अधिक है। इसलिए इसकी आवश्यकता है। घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धा में सुधार के लिए भारत में लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना अनिवार्य है। यह नीति लॉजिस्टिक्स के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए एक व्यापक अंतर-क्षेत्रीय और बहु-क्षेत्राधिकार ढांचे को निर्धारित करके उच्च लागत और दक्षता में कमी से जुड़े मुद्दों का हल निकालने का व्यापक प्रयास है। इस नीति के तहत लॉजिस्टक की लागत को सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 13 फीसदी से घटाकर 7.5 फीसदी तक लाने की कोशिश की जाएगी।