राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस की बैठक में हैती व कुछ अफ्रीकी देशों के अप्रवासी समझौते में शामिल होने पर अड़ियल रुख अपनाया है। उन्होंने अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इन देशों पर नस्लीय टिप्पणी की।
ट्रंप ने सांसदों को चेताते हुए सवाल उठाया कि वह कुछेक अफ्रीकी और हैती जैसे ‘शिटहोल देशों’ (गंदी नाली के कीड़ों वाले देश) के अप्रवासियों को अमेरिका में क्यों स्वीकार करें? क्यों न इनके बजाय नार्वे जैसे देशों को स्वीकार किया जाए जिन्हें बातचीत करने का ज्ञान है?
ट्रंप की टिप्पणी अमेरिका में नस्लीय रिमार्क देने वाला एक ताजा उदाहरण है जो कैबिनेट कक्ष में अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के रिपब्लिकन व डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के सदस्यों की बैठक के दौरान चीख-चीखकर दी गई।
ट्रंप ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब संसद में गैरकानूनी ढंग से अमेरिका पहुंचे बच्चों के मामले में द्विदलीय समझौते को कानूनी दर्जा देने के मामले पर बहस चल रही थी और डेमोक्रेटिक सीनेटर डिक डर्बिन व रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम उनके सामने सांसदों द्वारा पेश अप्रवासी विधेयक के बारे में बता रहे थे। इस टिप्पणी को सांसदों के लिए चेतावनी माना जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अल सल्वाडोर के अप्रवासियों को अब और अनुमति देने से इंकार कर दिया, जिससे अमेरिका में रह रहे अल सल्वाडोर मूल के दो लाख लोगों का हटाया जाना पक्का हो गया।
ट्रंप की टिप्पणी उस टीपीएस योजना की जानकारी लेने के बाद आई है जिसके तहत प्राकृतिक आपदाओं या घरेलू हिंसा से पीड़ित लोग अमेरिका में सुरक्षित स्थान तलाशते हुए आते हैं।
ट्रंप की इस अश्लील भाषा के बारे में पूछे जाने पर व्हाइट हाउस प्रवक्ता राज शाह ने कहा कि वाशिंगटन के कुछ नेता दूसरे देशों के लिए लड़ रहे हैं जबकि राष्ट्रपति अमेरिकी नागरिकों के लिए लड़ते रहेंगे।