अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से अपने देश में आव्रजन पर 60 दिन की रोक लगाने वाले एक्जीक्यूटिव आर्डर से भारत-अमेरिका के बीच संबंध प्रभावित होने की संभावना नहीं है। इसका इशारा देते हुए केंद्र सरकार के एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को बताया कि फिलहाल इस आदेश से भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है।
सूत्र ने कहा, यह देखते हुए कि लोगों से लोगों का संपर्क दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों की ‘आधारशिला’ है, हमें उम्मीद है कि यह संबंध आगे भी जारी रहेंगे।
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत सरकार के सूत्र ने कहा, हमने आदेश का संज्ञान लिया है। हम इसका अध्ययन कर रहे हैं। इसमें एच1बी जैसे गैर आव्रजन वीजा को शामिल नहीं किया गया है, जो दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी साबित होते हैं। हालांकि बृहस्पतिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के साथ टेलीफोन पर वार्ता की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दोनों के बीच ट्रंप प्रशासन के इस आदेश की चर्चा हुई है या नहीं।
बता दें कि ट्रंप ने बुधवार को उस एक्जीक्यूटिव आर्डर पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें विदेशियों के ग्रीन कार्ड हासिल करने और आव्रजन पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई थी। यह कदम कोरोना वायरस महामारी के चलते अर्थव्यवस्था को पहुंचे नुकसान से अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस आदेश का प्रभाव उन लोगों पर नहीं पड़ेगा, जो पहले से अमेरिका में रह रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस आदेश का प्रभाव कितने भारतीयों पर पड़ेगा। बता दें कि 2019 में अमेरिका में 5.77 लाख लोगों को वैध प्रवास की अनुमति दी गई थी।