शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से स्वदेशी अपनाने की अपील करते हुए कहा कि गांव-गांव में विदेशी सामान छोड़ने और देसी उत्पाद खरीदने का अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार केवल वैज्ञानिक रूप से परीक्षण किए गए बायोस्टिमुलेंट्स की बिक्री की अनुमति देगी और नकली बीज, कीटनाशक व उर्वरक बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को किसानों को आश्वस्त किया कि अमेरिका की तरफ से भारतीय कृषि उत्पादों पर बढ़ाए गए शुल्क से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत अपने विशाल घरेलू बाजार के साथ-साथ नए अंतरराष्ट्रीय बाजार भी तलाश करेगा, ताकि किसानों की उपज को उचित मूल्य मिल सके।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को दिया भरोसा
दिल्ली के पूसा कॉम्प्लेक्स में किसान नेताओं को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा, 'किसान भाइयों, चिंता मत करो। थोड़ी कठिनाई जरूर आएगी, लेकिन हम देख लेंगे। भारत जैसे बड़े देश में ही सारी उपज खप सकती है।' उन्होंने अमेरिका और यूरोप की जनसंख्या का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका की आबादी मात्र 30 करोड़ और यूरोप की 50 करोड़ है, जबकि भारत की 140 करोड़ की आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत है, कमजोरी नहीं।
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'किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा'
शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान को दोहराते हुए कहा कि 'देश के किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा, चाहे इसके लिए बड़ी कीमत ही क्यों न चुकानी पड़े।' उन्होंने साफ किया कि समझौता केवल बराबरी के आधार पर होगा- 'थोड़े हमारे, थोड़े तुम्हारे।'
'अमेरिका और भारत की खेती की स्थिति अलग'
कृषि मंत्री ने कहा कि अमेरिका और भारत की खेती की स्थिति अलग है। अमेरिका में बड़े पैमाने पर खेती होती है- 10,000 से 15,000 हेक्टेयर के खेत- जबकि भारत में अधिकांश किसानों के पास 3 एकड़ से भी कम जमीन है। साथ ही, अमेरिका में जीएम फसलों और उन्नत तकनीक के कारण प्रति हेक्टेयर लागत भी कम है। अगर अमेरिकी सोयाबीन, मक्का, गेहूं जैसे उत्पाद भारत में खुलकर आए, तो स्थानीय दाम गिरेंगे और किसानों को भारी नुकसान होगा।
उन्होंने आखिरी में कहा, 'यह हमारा परीक्षा का समय है, लेकिन हमें झुकना नहीं है। भारत किसानों के साथ खड़ा है और उनके हितों की रक्षा हर हाल में की जाएगी।'