मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने सोमवार को भारत के साथ अच्छे संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि द्वीप राष्ट्र की समृद्धि और सुरक्षा के लिए भारत के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं। नशीद 'रायसीना डायलॉग-2025'में भाग लेने के लिए दिल्ली में हैं।
'भारत के बिना समृद्ध नहीं हो सकता मालदीव'
नशीद ने समाचार एजेंसी 'एएनआई' से बातचीत में कहा, 'मुझे नहीं लगता कि भारत के साथ अच्छे संबंधों के बिना मालदीव समृद्ध हो सकता है। हमारी सुरक्षा, समृद्धि और स्थिरता हमारे अच्छे संबंधों पर निर्भर करती है।'
'गंभीर ऋण संकट का सामना कर रहा द्वीप राष्ट्र'
नशीद ने यह बयान उस समय दिया, जब मालदीव गंभीर ऋण संकट का सामना कर रहा है। चीन के ऋण देने के तरीके और व्यापार नीतियों से कर्ज और बढ़ा है। उन्होंने कहा, पहले (मालदीव में) सरकारों के बदलने से भारत के साथ संबंध अच्छे और बुरे होते रहे हैं, लेकिन हाल ही में नई सरकार ने भी भारत के साथ अपने मतभेदों को दूर किया है।
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'चीन के साथ एफटीए से मालदीव को नुकसान हुआ'
नशीद ने यह भी बताया कि मौजूदा सरकार चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने में कठिनाई महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, मालदीव-चीन मुक्त व्यापार समझौता जनवरी 2025 में लागू हुआ, जो देश की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है, क्योंकि मालदीव के निर्यात का हिस्सा बहुत कम है।
'मालदीव के सरकारी राजस्व में 64 फीसदी गिरावट'
एफटीए के तहत मालदीव ने चीन से आयात किए 91 फीसदी सामान पर टैरिफ हटा दिया है। इसके कारण सरकारी राजस्व में 64 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे मालदीव की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई है। इसके अलावा, यह समझौता मालदीव के पर्यटन क्षेत्र को चीन की कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं के लिए खोलता है, जिसका ज्यादा लाभ चीनी कंपनियों को हो रहा है, जबकि मालदीव की अर्थव्यवस्था को कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है।
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इसके विपरीत, भारत मालदीव का एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है, जिसने वित्तीय मदद, बुनियादी ढांचा विकास और सुरक्षा सहयोग प्रदान किया है। भारत और मालदीव के लंबे समय से अच्छे रिश्ते रहे हैं और भारत ने मालदीव की आजादी को 1966 में मान्यता दी थी।