महिला ने अदालत में बताया था कि उसकी शादी सितंबर 1986 में बेंगलुरु के एक कारोबारी से हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद उनके बीच झगड़े शुरू हो गए थे, और 2021 में कारोबारी ने उसे मुंबई भेज दिया था।
मुंबई की अदालत ने एक व्यक्ति को पूर्व पत्नी व उसके तीन पालतू कुत्तों की देखरेख व गुजारा-भत्ते के तौर पर 50 हजार रुपये महीने देने के निर्देश दिए हैं। बांद्रा कोर्ट की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि पालतू कुत्ते स्वस्थ जीवन और रिश्ते से टूटने पर पैदा हुई भावनात्मक कमी को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
विज्ञापन
55 साल की महिला ने पूर्व पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगा स्वयं व अपने तीन कुत्तों के लिए 70 हजार रुपये महीना गुजारा-भत्ता मांगा था। वहीं, कोर्ट में पति ने कहा था कि पालतू कुत्तों का भी गुजारा-भत्ता देने के लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन अदालत ने इस तर्क को नहीं माना। जज ने कहा, हम पति के जवाब से सहमत नहीं हैं। पालतू पशु एक शालीन जीवनशैली का हिस्सा हैं। वे स्वस्थ जीवन जीने के लिए भी जरूरी हैं। वे टूटे हुए रिश्तों की वजह से आई भावनात्मक कमियों को पूरा करते हैं, इसलिए गुजारा-भत्ता घटाया नहीं जा सकता।
सहनी पड़ती थी घरेलू हिंसा : महिला
महिला ने कहा था कि कारोबारी पति से 1986 में शादी हुई थी। 2021 में उनमें मतभेद हो गया और पूर्व पति ने उसे मुंबई भिजवा दिया। वादे के मुताबिक अलग होने के बाद उसने गुजारा भक्ता देने से इन्कार कर दिया। उसने दावा किया कि शादीशुदा जीवन में उसे घरेलू हिंसा भी सहनी पड़ी। उसके पास आय का स्रोत नहीं है, स्वास्थ्य समस्याएं हैं और तीनों कुत्ते भी उस पर आश्रित हैं। इसी वजह से उसे 70 हजार रुपये महीना गुजारा-भत्ता चाहिए।
विज्ञापन
पूर्व पति ने पत्नी के आरोपों को नकारा
पूर्व पति ने कोर्ट में अपनी पूर्व पत्नी के आरोपों को खारिज किया था। उसका कहना था कि उसने कभी भी घरेलू हिंसा नहीं की थी। बल्कि 2021 में उसकी पूर्व पत्नी छोड़ कर मुंबई चली आई थी। उसने कुत्तों के लिए गुजारा-भत्ता देने से इन्कार करते हुए कहा था कि इसके लिए उसे बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने खारिज की पति की दलीलें : अदालत ने मामले में पेश दस्तावेजों के आधार पर कहा कि घरेलू हिंसा के आरोप को अनदेखा नहीं किया जा सकता।