सेना के अधिकारियों के साथ बूजो
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दुश्मनों और घुसपैठियों को खदेरने में माहिर जांबाज स्वान प्रहरियों का नायकों जैसा स्वागत किया गया है। ‘बूजो’ ने हाल ही में पाक के कब्जे वाले कश्मीर से घुसपैठियों को सफलतापूर्वक पाकिस्तान लौटने को मजबूर कर दिया था।
उत्तरी कश्मीर में बर्फ की मोटी चादर पर धीमे-धीमे अपने दोस्त के साथ मार्च करते हुए डबल कोट जर्मन शेफर्ड बूजो का इस कामयाबी के लिए नायकों जैसा स्वागत किया गया।
सेना के 150 विशेषज्ञ कुत्तों में से एक बूजो एक खामोश प्रहरी है, जो नियंत्रण रेखा (एलाओसी) पर कड़ी निगरानी रखने के साथ-साथ आंतरिक क्षेत्रों में भी चौकसी करता है। इन कुत्तों की तीन मामलों में विशेषज्ञता है। आक्रमण, दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखना और विस्फोटकों का पता लगाने में विशेषज्ञता।
इन्हें नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया है। आमतौर पर डबल कोट जर्मन शेफर्ड कुत्तों की नस्ल ऐसे मौसम के लिए सबसे मुफीद होती है, जबकि लेब्राडॉर अंदरूनी हिस्सों में पहरेदारी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
ब्रिटिश लेखक मैल्कम बेवर्ली विलीस की पुस्तक द जर्मन शेफर्ड डॉग के मुताबिक डबल कोट साल के अलग-अलग मौसम में दो तरीके से काम करता है। सर्दियों में यह कुत्तों को कुदरती तौर पर गर्म रखता है। वहीं गर्मियों में उसकी चमड़ी सूर्य की रोशनी को प्रतिबिंबित कर कुत्तों को अत्यधिक गर्मी से बचाती है।
इनके हैंडलरों का कहना है कि कुत्तों में अद्भुत क्षमता होती है। ये सीमा पार से किसी भी घुसपैठ का पता लगाने में मदद करते हैं। इसके अलावा नशीले पदार्थों की तस्करी और यहां तक कि हिमस्खलन की संभावना के बारे में भी आगाह करने में मदद करते हैं। हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल कंवलजीत सिंह ढिल्लो ने भारतीय सेना की जूनियर को सलामी देने की परंपरा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ गुफा के बाहर प्रहरी कुत्ते को सलामी देते देखे गए थे।