संत करीब का एक दोहा है, सतसैया के दोहरे, ज्यों नावक के तीर। देखन में छोटे लगै, घाव करें गंभीर। यह दोहा इन दिनों कोलकाता फिल्म महोत्सव में शर्ट और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों पर सटीक बैठ रहा है। कोलकाता फिल्म महोत्सव में जहां बड़ी फिल्मों को देखने लोग पहुंच रहे हैं। वहीं शर्ट और डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी धूम मचा रही हैं। खास तौर पर दर्शक इनके जरिए डायरेक्टर जो मैसेज देना चाहते हैं, उसमें वे पूरी तरह से सफल हुए हैं। चाहे हम बात करें डाक्यूमेट्र फिल्में 'वर्लपूल' की या फिर मी एंड माइकल' की। दोनों को देखने के लिए दर्शकों की लंबी कतार देखी गई। मी एंड माइकल की निर्देशिका कोलकाता की निवासी हैं जबकि वर्लपूल की निर्देशिका मूल रूप से केरल, लेकिन फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं। खास बात यह रही कि दोनों ही फिल्मों की निर्देशिका महिला हैं। उल्लेखनीय है कि यह फिल्म महोत्सव 11 दिसंबर तक चलेगा। इसमें 29 देशों की 175 फिल्में कोलकाता के विभिन्न जगह दिखाईं जा रही हैं।
कोलकाता फिल्म महोत्सव को लगातार दर्शकों का प्यार मिल रहा है। सिनेमा प्रेमी भारी संख्या में आ रहे हैं। "शॉर्ट एंड डॉक्यूमेंट्रीः कम्पीटिशन ऑन इंडियन डॉक्यूमेंट्री फिल्म" की श्रेणी में 'मी एंड माइकल' और 'वर्लपूल' फिल्म की स्क्रीनिंग की गई। इन दोनों ही फिल्मों को देखने के लिए हर वर्ग का दर्शक वहां मौजूद था। स्क्रीनिंग के बाद दोनों फिल्मों की निर्देशिका ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए फिल्मों के बारे में जानकारी दी।
मूल रूप से केरला की रहेन वाली और फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में रह कर फिल्मों पर काम कर रहीं दीप्थी निर्मला कोलकाता फिल्म महोत्सव में लेकर आईं हैं, शॉर्ट फिल्म व्हर्लपूल। फिल्म की निर्देशिका दीप्थी निर्मला ने कहा यह मेरी पहली फिल्म है। फिल्म फेस्टिवल में मेरी फिल्म का शामिल होना, मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। दर्शकों का काफी सारा प्यार मिल रहा है। देखकर बड़ी खुशी हो रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, अगर मौका मिला तो इस पर बड़ी फिल्म बनाने का मन है। क्योंकि यह फिल्म मनोविज्ञान पर आधारित है। व्हर्लपूल एक ऐसी महिला के बारे में में कहानी है जो भावनात्मक भंवर फंस जाती है। उसका जीवन तब उथल-पुथल हो जाता है जब उसे पता चलता है कि उसका पति शायद वैसा नहीं है जैसा उसने सोचा था। फिल्म के निर्माता जेम्स जैकब है. फिल्म का संगीत शफीक रहमान और डेंसन डोमिनिक ने तैयार किया है।
इसी तरह से कोलकाता की ही रहने वाली और एक शिक्षिका जयश्री मुखर्जी निर्देशित 'मी एंड माइकल' को भी काफी सराहना मिल रही है। उन्होंने बताया कि मी एंड माइकल एक डॉक्यूमेंट्री है जो कोलकाता के वेंट्रिलोक्विस्ट (बोलती कठपुतली कला, कलाकार ऐसी भाव-भंगिमा बनाकर बोलता है, लगता है कि कोई और बोल रहा है।) प्रबीर कुमार दास की वास्तविक जीवन की कहानी बताती है। उनका अपनी वेंट्रिलोक्विजम डॉल माइकल के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है। उत्साहित होते हुए बोलीं, मैं यह देखकर आश्चर्यचकित रह गई कि गुड़िया दर्शकों से किस तरह बात कर सकती है। बचपन में मुझे वेंट्रिलोक्विस्ट शब्द के बारे में नहीं पता था। माइकल मेरा बचपन का दोस्त था और अब वह 50 साल का है। दर्शकों को यह फिल्म काफी भा रही है।