फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानें कैसे हुई ट्रेनों में शौचालय की शुरुआत?

Tue, 21 Jun 2016 04:59 PM IST
सुहैल हलीम/ बीबीसी संवाददाता
विज्ञापन
ट्रेन
विज्ञापन
डेढ़ सदी से भी अधिक के इंतजार के बाद भारत में रेलगाड़ियों के ड्राइवरों के लिए अच्छी खबर है। अब उनकी यात्रा कितनी भी लंबी हो, उन्हें शौचालय खोजने के लिए इंजन से उतर कर नहीं भागना पड़ेगा।
विज्ञापन


भारत में रेलगाड़ियों के ड्राइवरों को 'लोको पायलट' कहा जाता है, वे पायलट भले ही हों, लेकिन अब तक वे शौचालय की बुनियादी सुविधा से वंचित थे।

लोको पायलट मनप्रीत सिंह कहते हैं, "हमें आठ घंटे की शिफ्ट में केवल दस मिनट का ब्रेक मिलता है, और ऐसा नहीं है कि आप कहीं भी गाड़ी रोक कर खड़े हो जाएं। हमें पहले वायरलेस पर अगले स्टेशन के प्रभारी को सूचना देनी पड़ती है, फिर जल्दी से भागकर स्टेशन का टॉयलेट उपयोग करना पड़ता है। अब हमारी एक लंबे समय से रूकी हुई मांग स्वीकार कर ली गई है। हमें तो आसानी होगी ही, रेल गाड़ियां भी समय पर चल सकेंगी।"
Trending Videos

आधुनिक तकनीक के हैं ये टॉयलट

loco pilot
लोको पायलट कैसी परेशानी से गुजरते होंगे, यह अनुमान लगाना तो मुश्किल नहीं और वे इस मुश्किल से कैसे निपटते थे, उसके बारे में भी कई दिलचस्प कहानियां हैं।

अब रेलवे के इंजन में जो नए शौचालय बनाए जा रहे हैं, वे आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं, बिल्कुल वैसे जैसे आप हवाई जहाज में देखते हैं। 

हर शौचालय पर लगभग 18-20 लाख रुपए खर्च होंगे। ड्राइवरों को तो 160 साल इंतजार करना पड़ा। लेकिन यात्रियों को शौचालय की सुविधा केवल आधी सदी में ही मिल गई थी। लेकिन इसके पीछे एक रोचक कहानी है।
विज्ञापन

यात्री के खत से मिली शौचालय की सुविधा

लेटर ‌ज‌िसके बाद ट्रेन में लगाए गए शौचालय
एक यात्री अखिल चंद्र सेन ने 1909 में पश्चिम बंगाल के साहबगंज डिविजनल कार्यालय को एक अनोखा खत लिखा था। इसमें उन्होंने अपनी पीड़ा बयान की थी।  यह खत आज भी दिल्ली के रेल संग्रहालय में मौजूद है।
अखिल चंद्र सेन ने लिखा था,
मान्यवर,
"मैं ट्रेन से अहमदपुर स्टेशन पहुंचा। कटहल खाने से मेरा पेट फूला हुआ था। इसलिए मैं शौच के लिए चला गया, मैं फारिग हो ही रहा था कि गार्ड ने सीटी बजा दी, मैं एक हाथ में लोटा और दूसरे में धोती थाम भागा। मैं गिर पड़ा और वहां स्टेशन पर मौजूद औरतों और मर्दों सबने देखा। मैं अहमदपुर स्टेशन पर ही छूट गया।

यह बहुत गलत बात है, अगर यात्री शौच के लिए जाते हैं तब भी गार्ड कुछ मिनटों के लिए ट्रेन नहीं रोकते? इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि गार्ड पर भारी जुर्माना डाला जाए। वर्ना यह खबर अखबार को दे दूंगा।" इसके बाद यात्री ट्रेनों में शौचालय की सुविधा दे दी गई।

अब यात्री ट्रेनों में पुराने गंदे टॉयलेट की जगह नए 'बायो टॉयलेट' लगाए जा रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में ऐसे 17 हजार शौचालय बनाए जाएंगे। लेकिन इंजन में नए शौचालय बनाना टेढ़ी खीर है, क्योंकि इस पर खर्च भी बहुत अधिक है और पुराने इंजनों में जगह नहीं, इसलिए रेलवे के साठ हजार ड्राइवरों के लिए मंजिल अभी दूर है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें