सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में महिलाओं के साथ बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर मंगलवार को गहरी चिंता व्यक्त करते हुये प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल मीडिया से कहा कि देश में किसी भी मामले में यौन उत्पीड़न की घटना की पीड़ितों की तस्वीरें किसी भी रूप में प्रकाशित या प्रदर्शित नहीं की जाये।
शीर्ष अदालत ने यौन उत्पीड़न से पीड़ित नाबालिगों का इंटरव्यू नहीं करने की चेतावनी देते हुये कहा कि इसका दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है।
न्यायालय ने केन्द्र को देश भर में आश्रय गृहों में नाबालिगों के यौन शोषण की रोकथाम के लिये उठाये जानेवाले प्रस्तावित कदमों से उसे अवगत कराने का निर्देश दिया है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि बाल यौन उत्पीड़न से पीड़ित बच्चों से सिर्फ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोगों के सदस्य ही काउन्सिलर की मौजूदगी में इंटरव्यू कर सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने बिहार आश्रय गृह मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास करने के लिये दिल्ली राज्य महिला आयोग को आड़े हाथ लिया और कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
इससे पहले दिन में, न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह का संचालन करने वाले गैर सरकारी संगठन को वित्तीय सहायता देने पर बिहार सरकार को आड़े हाथ लिया। इस आश्रय गृह की लड़कियों से कथित रूप से बलात्कार और उनके यौन शोषण की घटनायें हुयी हैं।