असम में किशोरी पहलवान पर हमले के बाद मारवाड़ी समुदाय के माफी मांगने को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। 13 अगस्त को मारवाड़ी समुदाय के एक व्यवसायी ने 17 वर्षीय पहलवान पर हमला किया था।
शिवसागर में लड़की पर हमले के बाद काफी शिवसागर में 'गैर-असमिया' व्यवसायियों के खिलाफ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की गई थी। इसके बाद मारवाड़ी समुदाय के नेताओं के एक समूह ने घटना के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी। उन्होंने माफी मांगने के लिए घुटने टेके और पारंपरिक असमिया रीति-रिवाज के तहत 'पान-तमुल' (सुपारी और पान के पत्ते) दिए थे।
घटना के बाद लोगों में गुस्से को देखते हुए राज्य के कैबिनेट मंत्री रनोज पेगु मंगलवार को शिवसागर गए थे और मामले को सुलझाने के लिए बैठक की थी।
‘लड़की से मारपीट को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता’
सरमा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘यह घटना एक लड़की के साथ मारपीट से संबंधित थी, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। लोगों और विभिन्न संगठनों ने इस घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और शिक्षा एवं शिवसागर संरक्षक मंत्री रनोज पेगु ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया।’
घुटने टेककर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की घटना की कुछ वर्गों द्वारा आलोचना की गई, जिनका कहना था कि कानून को अपना काम करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''स्थानीय संगठनों ने व्यापारियों से पैसे की मांग नहीं की थी उन्होंने माफी मांगने के लिए कहा था। अगर स्थानीय संगठनों ने व्यवसायियों से पैसे की मांग की होती तो हम कार्रवाई करते।"
उन्होंने दावा किया कि पिछले दो महीनों में मध्य और निचले असम से महिलाओं के खिलाफ हिंसा की 22 घटनाएं सामने आई हैं और लोगों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विरोध करना चाहिए।