एआई व चैटजीपीटी को लेकर सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस का दावा है कि यह माध्यम मानव कर्मचारियों के सहकर्मी बनेंगे और नौकरियां नहीं खाएंगे। टीसीएस के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी मिलिंद लक्कड़ ने कहा कि यह माध्यम उत्पादकता बढ़ाएंगे, ऐसे सहकर्मी बनेंगे, जो कंपनियों के क्लाइंट्स की जरूरत समझने में समय देंगे। बता दें कि एआई व चैटजीपीटी का उपयोग बढ़ने पर नौकरियां खत्म होने का अंदेशा बीते कुछ महीनों से जताया जा रहा है।
प्रतियोगिता में बने रहने के लिए करने होते हैं बदलाव
देश में 6 लाख नौकरियां दे रही आईटी कंपनी टीसीएस के अधिकारी मिलिंद लक्कड़ ने कहा कि मानव कर्मचारी इनका सहयोग लेकर उद्योग और कस्टमर की जरूरतों के अनुसार काम करते रहेंगे। इस प्रकार नौकरियां खत्म नहीं होंगी, कंपनियों के बिजनेस मॉडल भी नहीं बदलेंगे, बल्कि नौकरियों की परिभाषा बदलेगी। लक्कड़ ने कहा कि कंपनी का कोई कस्टमर किस संदर्भ में काम चाहता है, यह समझना बेहद जरूरी है। खुद कस्टमर को भी प्रतियोगिता में बने रहने के लिए लगातार बदलाव करने होते हैं। एजेंसी
जगह नहीं लेगा, सहयोग करेगा
लक्कड़ ने कहा कि विभिन्न उद्योगों में मानव कर्मचारी और इन नये माध्यमों से किए जाने वाले काम का अनुपात अलग अलग हो सकता है। जो भी हो, इसकी वजह से कम से कम प्रबंधकीय स्तर पर ज्यादा मानव प्रतिभाओं की जरूरत नहीं रहेगी। निचले स्तर पर कर्मचारियों की मांग बनी रहेगी क्योंकि वही इसे कर सकते हैं। यह माध्यम बेशक भविष्य के लिए अच्छे हैं और बजाय मानव कर्मचारियों की जगह लेने के, उनके साथ सहयोग करेंगे। इनसे काम की उत्पादकता और निरंतरता सुधरेगी, इसे कम समय में पूरा करना आसान होगा।
कंपनियों को नीतियां बनानी होंगी
चैटजीपीटी बेहद क्रांतिकारी और उत्पादकता बढ़ाने वाला माध्यम है लेकिन कर्मचारी इसे कैसे उपयोग करें, इसके लिए कंपनियों और संस्थानों को नियम और नीतियां बनानी होंगी। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के अध्ययन के लिए बनी भारतीय परिषद के अध्यक्ष व जेनपैक्ट कंपनी के संस्थापक प्रमोद भसीन ने यह सलाह दी। उन्होंने कहा, चैटजीपीटी कई क्षेत्रों में काम आ सकता है लेकिन उपयोगकर्ताओं को अपने उत्पाद के साथ इसका खुलासा भी करना होगा।
देश के प्रमुख आर्थिक थिंक टैंक संस्थानों में शामिल परिषद के अध्यक्ष के तौर पर भसीन ने कहा ‘ कुछ वाजिब चिंताएं चैटजीपीटी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर जताई जा रही हैं, लेकिन दोनों क्षेत्र अधिक रोजगार पैदा करेंगे। लेखन, प्रजेंटेशन बनाने और अन्य कई कामों के लिए लगभग कंपनी को अब नीति बनानी होगी। अगर आप इन तकनीकों उपयोग कर रहे हैं, तो यह बताएं जरूर, छिपाएं नहीं। छिपाना मूल्यों और नैतिकता का उल्लंघन होगा। भसीन ने कहा कि दुनिया भर की सरकारों ने इन नई तकनीकों पर जो बाधाएं लगाई हैं, उन्हें भी जल्द हटाना होगा क्योंकि कानून हमेशा तकनीकों से बहुत पीछे छूट जाते हैं।
वैश्विक कंपनियां और अमेरिकी मंदी से उबरेंगे
मंदी को लेकर भसीन ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां दुनिया भर के कारोबारियाें की प्राथमिकता पर हैं। यह कंपनियां डिजिटल स्वरूप में परिवर्तन, कार्य कुशलता बढ़ाने, लागत घटाने के काम में जुटी हैं। वे जितनी लागत कम करना चाहेंगी, उतनी बड़ी संख्या में भारत आएंगी। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि इस साल उलझी दिख रहीं कंपनियों को मंदी से लंबे समय में परेशानी होगी। वे मंदी से उबर जाएंगी, कुछ असर हुआ तो मामूली होगा। अमेरिका में मंदी उतनी बड़ी नजर नहीं आ रही है, जितना शुरू में सोचा गया था। यह हल्की मंदी है और लोगों की बचत बढ़ रही है।