केंद्रीय राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर मंगलवार को 'डीएनपीए कॉन्क्लेव और डिजिटल इंपैक्ट अवार्ड्स' के दूसरे संस्करण में शामिल हुए। कॉन्क्लेव के दौरान अपने संबोधन में केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियों और डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स के आमदनी बंटवारे में विषमताएं हैं और डिजिटल इंडिया एक्ट में इस असंतुलन को खत्म करने की कोशिश की गई है।
'डिजिटल इंडिया एक्ट में किए गए हैं प्रावधान'
नई दिल्ली के शंगरी-ला होटल में आयोजित हुए डीएनपीए कॉन्क्लेव केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि 'हम कंटेंट बनाने वालों और कंटेंट को मोनेटाइज करने वालों के बीच की इस गहरी विषमता से चिंतित हैं।' उन्होंने कहा कि 'डिजिटल इंडिया एक्ट, 2024 के आम चुनाव के बाद लागू हो जाएगा और उसमें भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम के छोटे, मध्यम कंटेंट क्रिएटर्स और बड़ी तकनीकी कंपनियों के बीच की आमदनी विषमता से निपटने के प्रावधान किए गए हैं। विषमता विधायी, बेहद कम और नए नियमों के तहत रेगुलेटेड होनी चाहिए।'
इससे पहले राजीव चंद्रशेखर ने भारत के विस्तृत इंटरनेट स्पेस को कानून के दायरे में लाने की बात कही। उन्होंने कहा 'हम चाहते हैं कि इंटरनेट स्वतंत्र रहे। हम नहीं चाहते कि इंटरनेट या इसके मोनेटाइजेशन पर सिर्फ दो या तीन बड़ी कंपनियों का नियंत्रण रहे। अभी तकनीकी कंपनियां अपनी मर्जी से काम कर रही हैं।'
क्यों उठ रही है ये मांग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के चलते तकनीक की दुनिया में आ रहे बदलावों और इसके चलते डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों पर डीएनपीए कॉन्क्लेव में चर्चा हुई, जिसमें विभिन्न नीतिनियंता, भारतीय और विदेशी मीडिया इंडस्ट्री के दिग्गज शामिल हुए। दरअसल बड़ी तकनीकी कंपनियां जैसे सर्च इंजन गूगल के स्वामित्व वाली एल्फाबेट, फेसबुक आदि अभी राजस्व का बड़ा हिस्सा ले रहे हैं, जबकि जिन न्यूज पब्लिशर्स की खबरें वे अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए उन्हें आमदनी का बेहद कम हिस्सा मिलता है। भारत में इस मुद्दे को सुलझाने की मांग उठ रही है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका और कनाडा में भी ऐसी मांग हो रही है।
अमिताभ कांत भी डीएनपीए कॉन्क्लेव में हुए शामिल
कॉन्क्लेव में नीति आयोग के पूर्व सीईओ और जी20 के शेरपा रहे अमिताभ कांत ने भारत की डिजिटल सेक्टर के लिए बनाई गई नीतियों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 'हाल के वर्षों में पश्चिमी देश बड़ी बड़ी तकनीकी कंपनियों के दम पर आगे बढ़े हैं। ऐसा ही चीन ने किया है और यह मामला एकाधिकार का है, लेकिन भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसने अलग रास्ता अपनाया है।'
कॉन्क्लेव में WAN-IFRA की मीडिया पॉलिसी और पब्लिक अफेयर्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एलेना पेरोती, एक्सेल स्प्रिंगर के वरिष्ठ सलाहकार फ्लोरियन नेहम, न्यूज मीडिया कनाडा के सीईओ और प्रेसिडेंट पॉल दीगन आदि भी शामिल हुए और इन लोगों ने अपने विचार भी रखे।