डीएनडी फ्लाई ओवर पर टोल टैक्स वसूलने के मामले में बात अब टोल कंपनी और नोएडा अथॉरिटी के बीच हुए करार पर आ गई है। दोनों के बीच जिन शर्तों पर करार किया गया उसी की वजह से टोल टैक्स वसूली का सिलसिला अंतहीन हो चला है।
यदि दोनों पक्ष इसी करार पर कायम रहते हैं तो आम जनता को इस पुल पर अगले सौ सालों में भी टोल टैक्स की वसूली से निजात मिलनी मुश्किल दिख रही है। हाईकोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस अरुण टंडन की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले पर घंटों बहस चली।
टोल कंपनी के वकील अजय भनोट ने कहा कि नोएडा अथॉरिटी से कंपनी का 30 वर्षों के लिए करार हुआ है। कंपनी संविदा के अनुसार टोल टैक्स की वसूली कर रही है।
यदि तीस वर्षों में वसूली पूरी नहीं हो पाती है तो कंपनी पुल नोएडा अथॉरिटी को वापस कर देगी। यदि संविदा बीच में भंग होती है तो नोएडा अथॉरिटी को कंपनी को दो हजार करोड़ रुपये हर्जाना देना होगा।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों के साथ हुए करार का खामियाजा भुगतने के लिए आम जनता को नहीं छोड़ा जा सकता है। शर्त है कि निर्धारित वसूली न हो पाने के कारण बकाया धनराशि मूल लागत में जोड़ दी जाती है, इससे लागत बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये पहुंच गई।
कंपनी का कहना था कि यदि करार रद्द हो जाता है तो कंपनी के शेयर गिर जाएंगे और क्रेडिटर अपना हाथ खींच लेंगे। याचिका पर सोमवार को भी सुनवाई होगी।