मुख्यमंत्री एमके स्टालिन बनाम राज्यपाल आरएन रवि
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लंबित विधेयकों को अधिनियम घोषित करने के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाईं। पार्टी के वरिष्ठ नेता आरएस भारती ने मीडिया से कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के अनुसार राज्यपाल आरएन रवि अब सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति नहीं रह गए हैं। भारती ने राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह राज भवन से चले जाते हैं, तो माना जा सकता है कि वह स्वाभिमानी व्यक्ति हैं, क्योंकि आजादी के बाद से अदालत ने किसी भी राज्यपाल के खिलाफ ऐसा फैसला नहीं सुनाया है। द्रमुक नेता ने आरोप लगाया कि रवि ने विधेयकों को मंजूरी न देकर विपक्षी दल से भी ज्यादा विरोधी भूमिका निभाई और दुश्मन की तरह व्यवहार किया।
यह पूछे जाने पर कि क्या फैसले के मद्देनजर मुख्यमंत्री राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होंगे या सरकार कुलपतियों की नियुक्ति करेगी, द्रमुक के राज्यसभा सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पी विल्सन ने कहा कि ये 10 विधेयक राज्यपाल को उन विश्वविद्यालयों से हटाने के लिए थे, जहां के वे कुलाधिपति थे। ये विधेयक इसलिए आवश्यक हो गए थे, क्योंकि राज्यपाल कुलपतियों की नियुक्ति सहित अन्य कार्यों में अड़चन डाल रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सजा माफी और लोक सेवा आयोग में नियुक्तियों से जुड़े मामलों को लटकाए रखा था, जिसके चलते शीर्ष अदालत में मामला दायर करना पड़ा।
द्रमुक सांसद विल्सन ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार इन विधेयकों को राज्यपाल की ओर से स्वीकृत माना जाएगा और इसलिए राज्यपाल आज से उस (कुलाधिपति) पद से मुक्त हो गए हैं। विधेयकों के प्रावधानों के अनुसार तमिलनाडु सरकार की ओर से नामित व्यक्ति कुलाधिपति होगा। वहीं, पार्टी सूत्रों ने संकेत दिए कि मुख्यमंत्री राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होंगे।
केरल के सीएम बोले-लोकतंत्र की जीत
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है। शीर्ष अदालत का फैसला संघीय व्यवस्था और विधायिका के अधिकारों को कायम रखे है। हम ऐसी स्थिति में हैं, जहां विधायिका की ओर से पारित विधेयक 23 महीने तक अटके हुए हैं और अनिश्चित हैं। केरल इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। शीर्ष अदालत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि राज्यपालों को कैबिनेट की सलाह के अनुसार काम करना चाहिए।
पश्चिम बंगाल विस अध्यक्ष बोले-उम्मीद है हमारे गनर्वर भी अटके विधेयकों पर जल्द लेंगे फैसला
तमिलनाडु मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल सरकार को उम्मीद है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस के पास अटके 23 विधेयकों को जल्द अनुमति मिलेगी। प. बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने कहा कि फैसला राज्यपाल को सांविधानिक तरीके से समय सीमा के भीतर विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए बाध्य करेगा। उन्हें उम्मीद है कि अब राज्यपाल इन विधेयकों पर जल्द ही कोई फैसला लेंगे और राज्य के विकास कार्यों में कोई और रुकावट नहीं आएगी।