अरुणाचल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत उत्तरी राज्यों में फैले लगभग 600 मठ चार प्रकार की तिब्बती और भारतीय बौद्ध परंपराओं में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। ये बौद्ध मठ आधुनिक विषय और अंग्रेजी भी पढ़ाते हैं, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा प्रयास के बाहर इन पाठ्यक्रमों में एकरूपता का अभाव है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं और धर्मों के मिश्रण से एक व्यापक पहचान बनाना है।
हिमालयी मठों को चीन के प्रभाव से बचाने के लिए भारत ने रणनीति के तहत शिक्षा को अपना हथियार बनाया है। भारत पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक के बौद्ध मठों में शिक्षा में अहम बदलाव करने जा रहा है। शिक्षा को सुव्यवस्थित करने और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। शिक्षा में सुधार भारत सरकार की रणनीतिक योजना का हिस्सा है।
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अरुणाचल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत उत्तरी राज्यों में फैले लगभग 600 मठ चार प्रकार की तिब्बती और भारतीय बौद्ध परंपराओं में प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। ये बौद्ध मठ आधुनिक विषय और अंग्रेजी भी पढ़ाते हैं, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा प्रयास के बाहर इन पाठ्यक्रमों में एकरूपता का अभाव है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं और धर्मों के मिश्रण से एक व्यापक पहचान बनाना है।
मठों को चीन से बचाने का प्रयास
अरुणाचल में सत्तारूढ़ भाजपा के बौद्ध कार्यकर्ता मालिंग गोम्बू ने कहा, हम बौद्ध धर्म के साथ शिक्षा के माध्यम से भारतीय पहचान को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चीन कभी भी हिमालय में हमारे मठों पर नियंत्रण न कर सके। मठों में रहने वाले हजारों बच्चे भारतीय शिक्षा के हकदार हैं।