कल्लाकुरिची शराब कांड की जांच सीबीआई को सौंपने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को लेकर डीएमके ने अन्नाद्रमुक को घेरा। डीएमके ने कहा कि अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने से सरकार को रोक रहे हैं। जबकि पहले एक मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने पर पलानीस्वामी खुद ही शीर्ष अदालत पहुंचे थे।
डीएमके नेता आरएस भारती ने कहा कि 2018 में जब उनकी पार्टी ने अन्नाद्रमुक शासन के तहत राजमार्ग विभाग में लगभग 4,800 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, तो अदालत ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। भारती ने कहा कि हमने सीबीआई जांच की मांग नहीं की थी, लेकिन अदालत ने निर्देश दिया कि। तब पलानीस्वामी ने ही सीबीआई की जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से स्टे लिया था।
भारती ने कहा कि जब मामला शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए आया तो DMK ने दलील दी कि उसे CBI जांच के खिलाफ पलानीस्वामी की याचिका पर कोई आपत्ति नहीं है। CBI जांच की मांग करना उनकी पार्टी का पसंदीदा विकल्प नहीं रहा है।
भारती ने 2016 में राज्य विधानसभा चुनाव से पहले तिरुपुर में एक कंटेनर लॉरी में रखे 570 करोड़ रुपये की जब्ती के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित CBI जांच के परिणाम पर आश्चर्य जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अन्नाद्रमुक सत्ता में थी। चुनाव अधिकारियों ने नकदी जब्त की और DMK उच्च न्यायालय में चली गई। आज तक मामले में क्या CBI ने जांच शुरू की?
कल्लकुरिची मुद्दे पर राज्य सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर भारती ने कहा कि दोषियों की त्वरित गिरफ्तारी की गई। भारती ने दोहराया कि वे पलानीस्वामी ही थे जिन्होंने कथित भ्रष्टाचार के मामले को CBI को स्थानांतरित करने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 20 नवंबर को कल्लकुरिची शराब त्रासदी मामले की जांच CBI को सौंपी थी। इसे लेकर कानून मंत्री एस रेगुपथी ने कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करने पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को अपील करने का अधिकार है। मंत्री ने कहा कि राज्य की सीबीसीआईडी जांच सही दिशा में है और सरकार के पास अपने मामले का समर्थन करने के लिए सबूत हैं।
याचिका दायर करने वाली अन्नाद्रमुक ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह न्याय के लिए उनकी निरंतर लड़ाई की जीत है। अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी ने कहा कि अगर डीएमके ने कुछ भी गलत नहीं किया है तो उसे उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर नहीं करनी चाहिए।