बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को सलाहकार चेतन पाटिल को जमानत दे दी, जिसे अगस्त महीने में मालवन के राजकोट किले में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि 26 अगस्त को सिंधुदुर्ग जिले में प्रतिष्ठित मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की 35 फीट ऊंची मूर्ति ढह गई थी, जिसका लगभग नौ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौसेना दिवस पर अनावरण किया था।
30 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था चेतन पाटिल
इस मामले में चेतन पाटिल को 30 अगस्त को कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया था। वहीं मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ए एस किलोर की एकल पीठ ने गुरुवार को कहा कि चेतन पाटिल को मामले में फंसाने का कोई मामला नहीं बनता, क्योंकि उन्हें मूर्ति का संरचनात्मक डिजाइनर नियुक्त नहीं किया गया था।
दूसरे आरोपी की याचिक पर 25 नवंबर को होगी सुनवाई
मामले में पीठ ने आगे कहा कि चेतन पाटिल ने केवल मूर्ति के आधार की संरचनात्मक स्थिरता रिपोर्ट प्रस्तुत की थी और गिरने के बाद भी आधार बरकरार था। वहीं इस मामले में एक अन्य आरोपी जयदीप आप्टे, जो मूर्तिकार और ठेकेदार था, को भी गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि वह 25 नवंबर को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा।
शिवाजी की मूर्ति ढहने पर दोनों पर दर्ज किया गया था केस
सिंधुदुर्ग पुलिस ने पिछले महीने जयदीप आप्टे और चेतन पाटिल के खिलाफ मूर्ति ढहने के मामले में लापरवाही और अन्य अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज की थी। चेतन पाटिल और जयदीप आप्टे ने सत्र न्यायालय की तरफ से उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
चुनावी राज्य में खूब गर्माया था मुद्दा
राजकोट किले में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति ढहने के मामले को लेकर राज्य में बड़े पैमाने पर राजनीतिक बयानबाजी हुई थी। इस पर राज्य में विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा था। वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने भी राज्य की जनता से माफी मांगी थी।